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राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 25 नवम्बर से

राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 25 नवम्बर से

परीक्षार्थी 23, 24 नवम्बर को प्रवेश पत्र संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं

ग्वालियर 22 नवम्बर 09। मप्र. लोक सेवा आयोग इंदौर द्वारा आयोजित राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2008, 25 नवम्बर से 13 दिसम्बर तक आयोजित की जा रही है। ग्वालियर संभाग के उपायुक्त राजस्व ने बताया कि कार्यालय आयुक्त ग्वालियर संभाग ग्वालियर में कंट्राल रूम की स्थापना की गई है। जो 23 और 24 नवम्बर को कार्यालयीन समय प्रात: साढ़े 10 बजे से शाम साढ़े 5 बजे तक खुलेगा। जिन परीक्षार्थियों को लोक सेवा आयोग इंदौर द्वारा जारी प्रवेश पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं वे परीक्षार्थी परीक्षा से संबंधित समस्त कागजात परीक्षा प्रभारी उपायुक्त राजस्व को दिखाकर परीक्षा केन्द्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

 

आसपड़ौस : अबू नहीं, संविधान पिटा- राकेश अचल

आसपड़ौस :  अबू नहीं, संविधान पिटा

राकेश अचल

(लेखक ग्‍वालियर चम्‍बल क्षेत्र के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं )

महाराष्ट्र विधानसभा मे जो हुआ वह शर्मनाक है। राज ठाकरे के विधायकों ने पूरी दुनियां मे महाराष्ट्र की और उससे बढ़कर इस अखंड राष्ट्र भारत की नाक कटवा दी। उन्होने हिंदी में शपथ लेने पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी को नहीं पीटा बल्कि पूरे संविधान पर हमला किया है।

       भारत के संविधान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने प्रत्येक भारतवासी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा दी है। भारत मे रहने वाला कोई भी व्यक्ति किसी भी भाषा में लिख सकता है, पढ़ सकता है, बोल सकता है। अभिव्यक्ति की इस स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कानून है। कानून के उल्लघंन पर सजा का प्रावधान हैं लेकिन लगता है राजनीति में नए-नए आए राजठाकरे या तो इन कानूनों, सजाओं की परवाह नही करते या फिर वे अनपढ़ है, उनके लिए संविधान की मोटी किताब में काली स्याही में लिखें सोने के अच्छर भैंस के बराबर है।

       मराठी मानुष की राजनीति करने वाले राज को उनके चाचा बाल ठाकरे ने जो संस्कार दिए थे वे अब फल फूल रहे है। व्यक्तिगत अस्मिता की रक्षा के लिए मराठी भाषा और मराठी मानुष का इस्तेमाल करने वाले इस युवा तुर्क की समझ में क्यों नही आता कि हाल में विधानसभा चुनावों मे जनता ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को अस्वीकार कर दिया है। दो सैंकड़ा सीटों वाली विधान सभा में राज के केवल एक दर्जन गुर्गे ही विधायक बनकर प्रवेष पा सके है।

       दर असल महाराष्ट में राष्ट्र के विरूध्द भावनाएं भड़काने का जो खेल चार दषक पहले शुरू हुआ था, वह रह-रह कर अब भी जारी है, वोटो की राजनीति के आगे नतमस्तक सत्तारूढ़ दल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में सलंग्न क्षेत्रीय दलों के आगे बौने साबित हो रहे है।

       विधानसभा में अबू आजमी पर हमला करने वाले मनसे के 4 विधायको के निलंबन से इस शर्मनाक घटना का पटाक्षेप होने वाला नहीं है। इस घटना की देष व्यापी प्रतिक्रिया होना चाहिए। राजठाकरें के खिलाफ कानूनी कार्रावाई के लिए राज्य सरकार आगे क्यों नहीं आ रही? क्यों राज के फतबों को गैर कानूनी करार नहीं दिया जा रहा? राज के खिलाफ जो काम महाराष्ट्रके महान हिंदी प्रेमियों को करना चाहिए था, वह म.प्र. के हिंदी प्रेमियो ने किया।

       मंदसौर की एक अदालत ने एक हिंदी सेवी की प्रार्थना पर संज्ञान लेते हुए राजठाकरे के खिलाफ राष्ट्रभाषा के अपमान का प्रकरण दर्ज कर इस दिषा में पहल की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या मंदसौर की अदालत महाराष्ट्र कि इस मराठीदा को सबक सिखा पाएगी?

       वस्तुत: अब समय आ गया है जब क्षेत्रवाद तथा भाषावाद के नाम पर होने वालो राजनीति का बहिष्कार किया जाए। यदि यह न हुआ तो आमयी मुबई और आपण महाराष्ट्र का भाव मराठियों को महाराष्ट्र के बाहर परेषानी का सबब बन सकता है।

       दक्षिण के हिंदी विरोधी आंदोलन का हश्र सबने देखा है। तमिलनाडु में हिंदी का प्रबल विरोध करने वाले द्रविण पुत्र व्यापार के लिए फर्राटेदार हिंदी बोलते है। कष्मीर मे पष्तो बोलने बालों का पेट हिंदी में बोले बिना भर नहीं सकता। इस मामले में पूर्वी राज्य एक आदर्ष उदाहरण है। पूर्व के किसी भी राज्य में हिंदी को लेकर कहीं कोई दुराग्रह नहीं है, असम का वोडो आंदोलन भी फुस्स हो चुका है। एक दिन यही सब मनसे के मराठी आंदोलन का भी होगा।

       मराठी भाषा को लेकर पूरे देष मे किसी को कोई दुराग्रह नही है। मराठी साहित्य का सर्वाधिक अनुवाद हिंदी में हुआ। मराठी सद-संस्कृति और सुसभ्यता की वाहक भाषा है। उसे लेकर राज परेषान क्यों है? राज शायद नही जानते कि भाषाओ का अस्तित्व राजनीतिक आंदोलनों से नहीं संस्कारों से बनता है। साढ़े तीन हजार सालों से तमिल भाषा का अस्तित्व किसी राजनीतिक आंदोलन की वजह से नहीं बल्कि संस्कारों की वजह से है।

       बेहतर हो कि राजठाकरे मराठी प्रेम को छोड़ मराठी मानष में षिक्षा, स्वास्थ्य और उनके आर्थिक हको के लिए संघर्ष करें। मराठियों के लिए कष्मीरियों की तरह विषेषाधिकारों की मांग करना बेमानी है। राज भूल जाते है कि महाराष्ट्र के महान नेताओं को राष्ट्र ने अपने सिरमाथे उनके मराठी भाषी होने के कारण नहीं उनकी योग्यताओं के कारण लिया था। लोकसभा अध्यक्ष से लेकर केंद्र सरकार के तमाम महत्व पूर्ण मंत्रालयों की कमान शुरू से महाराष्ट्र के नेताओं के हाथ मे रही। इसके लिए न बालठाकरे साहब के आंदोलन की जरूरत पड़ी न किसी और भाषाई आंदोलन की।

       संविधान समिति के प्रमुख डा. भीमराव अंबेडकर से लेकर सुषील षिंदे तक को देष में सम्मान। षिव सेना या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने ही दिलाया। मराठी भाषी अच्छी तरह जानते है कि महाराष्ट्र के इन बेटो को सम्मान उनकी योग्यता, कर्मठता और राष्ट्र के प्रति निष्ठा से मिला है।

       मेरे ख्याल से राजठाकरे के कुव्सित राजनीतिक आंदोलन का विरोध महाराष्ट्र से ही शुरू होना चाहिए। मराठी जनता को समझना चाहिए कि राज उनका हित नही अहित कर रहे है। महाराष्ट्र की अर्थ व्यवस्था में अकेले मराठियों का नही बल्कि पूरे देष की भागीदारी है देष के प्रत्येक राज्य की प्रतिभा से महाराष्ट्र, महा-राष्ट्र बना है। अगर इसे बाधित किया गया तो महाराष्ट्र ''महा-राष्ट्र'' नही रह जाएगा।

       महाराष्ट्र को संप्रभु भारत राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए सेनाओं की नहीं प्रतिबंध्द राजनीतिक दलो की जरूरत है राज और उध्दव ठाकरे को चाहिए कि वे यदि सचमुच मराठी अस्मिता की रक्षा करना चाहते है तो अपनी-अपनी सेनाओं की पहचान समाप्त कर राष्ट्रीय दलो मे अपने आपको समाहित कर संघर्ष करें।

       आज जब पूरी दुनियां बहुत छोटी हो गई है। तब महाराष्ट्र में राजठाकरे के आंदोलन से देष बदनाम ही हो रहा है। आजादी के सत्तर साल बाद भी भारत में भाषा और क्षेत्र के नाम पर आंदोलनों के जीवित रहने से लगता है कि हमारी आजादी या तो अधूरी है, या हम आजदी का मर्म ही नही समझ सके।

       समय है जब पूरा देष दुनियां की महाषक्तियों के मुकाबले भारत को ''महान भारत'' बनाने के लिए भाषा और क्षेत्र की संकीर्णताओं से बाहर आकर पूरी ताकत के साथ एक जुट होकर खड़ा हों। इस एक जुटता में जो आड़े आए, उसे तिरस्कृत कर देना ही श्रेयस्कर है फिर चाहे वह राज ठाकरे हो या बालठाकरे। जो राष्ट्र का नही वह ''महाराष्ट्र'' का कैसे हो सकता है? संविधान के आगे सब बराबर है। (भावार्थ)

                             

                                                                                                   Rakesh Achal

 

शिल्पा की मेहंदी

 

उद्धरण

YouTube - शिल्पा की मेहंदी
  

गन्ना मत उगाओ- सुन्‍दर लाल बहुगुणा

 

उद्धरण

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Jadugar Jadoo Kar Jayega - Dharmendra, Hema Malini, Zeenat Aman - Alibab...

  YouTube - Jadugar Jadoo Kar Jayega - Dharmendra, Hema Malini, Zeenat Aman - Alibab...
  

Pritviraj Chauhan (1168 - 1192) - Revenge And Death - A FILM FOR Kids

YouTube - Pritviraj Chauhan (1168 - 1192) - Revenge And Death - Kids
  

कार्मल कान्वेंट हाईस्कूल का वार्षिकोत्सव विभिन्न रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मना

शिक्षा ही प्रगति का आधार : डा. जोसेफ

बच्चे देश का भविष्य : जगदीश शर्मा

कार्मल कान्वेंट हाईस्कूल का वार्षिकोत्सव विभिन्न रंगारंग कार्यक्रमों के साथ मना

ग्वालियर। ग्वालियर धार्मप्रांत के धार्माधयक्ष (विशप रेवेरेंट) डा. जोसेफ कैथेथारा ने कहा है कि शिक्षा ही किसी भी देश की प्रगति का आधाार है। अत: बच्चों को शिक्षित करने के लिए सभी को पहल करनी चाहिए। डा. जोसेफ कैथेथारा के अनुसार शिक्षित बच्चे राष्ट्र का भविष्य है। डा. जोसेफ कैथेथारा कल सायं कार्मल कान्वेंट हाईस्कूल फालका बाजार में आयोजित वार्षिक उत्सव समारोह को संबोधिात कर रहे थे। समारोह की अधयक्षता ग्वालियर विकास प्राधिाकरण के अधयक्ष जगदीश  शर्मा ने की। उन्होंने भी बच्चों को देश का भविष्य बताकर उनसे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए जी तोड़ मेहनत करने का आव्हान किया।

इससे पूर्व मुख्य अतिथि व अधयक्ष ने विघालय के छात्रों व छात्राओं द्वारा प्रस्तुत की गई विभिन्न प्रस्तुतियों की सराहना की। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विशप रेवेरेंट डा. जोसेफ कैथेथारा ग्वालियर एवं अधयक्ष ग्वालियर विकास प्राधिाकरण जगदीश शर्मा, विघालय की मैनेजर सिस्टर यूनिस, विघालय की प्राचार्या सिस्टर सोमिता ने दीप प्रज्जवलन कर किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्वागत नृत्य तद्उपरांत प्राथमिक विभाग के नन्हें-नन्हें बच्चों ने रंग-बिरंगे फूलों से सुसज्जित होकर गीत मैंने कहा फूलों से प्रस्तुत किया। माधयमिक एवं हाईस्कूल के विघार्थियों द्वारा पर्यावरणीय पृष्ठभूमि पर आधाारित नाटिकाएं प्रस्तुत की। विभिन्न भाषाओं एवं विभिन्न वेशभूषाओं में सजे विघार्थियों ने नृत्य एवं गायन की प्रस्तुति दी।

प्रभू की महिमा को बखान करने वाला बाईबिल के अंश पर आधाारित नाटिका जो कुछ किया तुमने किया वह मेरे लिए किया प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति अखंड भारत की एकता को दर्शाने वाला अनेकता में एकता नाटिका प्रस्तुत की गई और भारत माता को नमन किया गया। तत्पश्चात् विघालय की प्राचार्या सिस्टर सोमिता द्वारा स्वागत भाषण एवं वार्षिक गतिविधिायों की रिपोर्ट पेश की गई। इस मौके पर गत वर्ष हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में प्रावीण्य सूची में आए विघार्थियों को पुरुस्कार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन धान्यवाद ज्ञापन द्वारा हुआ। इस मौके पर स्कूल के बोर्ड मेम्बर विनय अग्रवाल व अन्य आमंत्रित अतिथि भी मौजूद थे।

 

दल तंत्र भगाओ - जनतंत्र बचाओ अभियान में सहभागिता की अपील- गोपाल दास गर्ग

दल तंत्र भगाओ - जनतंत्र बचाओ अभियान में सहभागिता की अपील- गोपाल दास गर्ग

सम्मानीय देशवासियों,

       आज की दल तंत्रीय राजनीति ने देश की एकता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखना प्रश्नांकित कर दिया है। समूचे देश में चारों तरफ देश का विद्यटन हो रहा है। प्रत्येक राजनीतिक दल अपनी अपनी सत्ता और संप्रभुता स्थापित करने में लगा है। जिसके लिये वह आये दिन दलवाद, जातिवाद, लिंगवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, आर्थिक सम्पन्नता/विपन्नता वाद आदि अनेकानेक वादों का जहर फैलाकर अपने अपने तरीके से अपने लक्ष्य को पाने के लिये अमर्यादित आचरण कर रहा है।

यदि समय रहते जनतंत्र को बचाने का कोई कारगर उपचार नहीं हुआ तो देश से जंनतंत्र पूरी तरह मिट जावेगा। देश टुकड़े-टुकड़े हो जावेगा। आज का शोषित वर्ग और अधिक शोषित होगा तथा दल तंत्रीय राजनीति के पोषक, स्वंयभू बन जावेगें।

 

       अभियान का किसी दल से या दल के प्रत्याशी से कोई विरोध नहीं है अपितु दल तंत्रीय शासन प्रणाली से विरोध है। दल का प्रत्याशी कहने को जनप्रतिनिधि होता है किन्तु व्यवहारिक सत्य यह है कि वह जनप्रतिनिधि के नाम वास्तविक तौर पर वह अपने दल का प्रतिनिधि होता है। उसकी निष्ठा पूर्णत: अपने दल के प्रति होती है। दल का प्रत्याशी देश, देश के संविधान, देश की जनता या क्षेत्र के मतदाताओं के प्रति कतई वफादार नहीं होता। वह केवल अपने दल के प्रति ही वफादार रहता है। लोकसभा या विधानसभा में प्रस्तुत विषयों पर वह अपने दल के हितों के अधीन अपना वोट देता है न कि जनहित में। इस प्रकार जनहित, दलीय राजनीति में नष्ट हो जाता है।

       दल का प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि के रूप में समय-समय पर भारत के संविधान के अनुच्छेद 173 (क) अंतर्गत बारम्बार यह शपथ लेता है कि वह विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रध्दा और निष्ठा रखेगा तथा भारत की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण रखेगा। किन्तु व्यवहार में वह इस शपथ को भूल जाता है और दलीय दल-दल में उलझ जाता है।

इस सत्य का प्रमाण आये दिन सदन में सभी दलों द्वारा किये जा रहे आचरण से स्पष्ट प्रमाणित हो रहा है। कोई भी दल तथा उसके प्रतिनिधि स्परूप चुना गया प्रतिनिधि, विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति न तो सच्ची श्रध्दा रखता है और न ही निष्ठा।

जनता द्वारा चुनें गये ये सभी जनप्रतिनिधि, भारत की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण न रखकर, केवल अपने-अपने दल की संप्रभुता और अखण्डता को अक्षुण्ण बनाये रखने के लिये भारत के संविधान तथा उसके अंतर्गत निर्मित एवं स्थापित विधि के विपरीत प्राय: अविधिक आचरण कर सदनों को आये दिन शर्मसार करते रहते है। सभी राजनीतिक दलों का यह आचरण, जनतंत्र की हत्या कर, दल तंत्र की महत्ता को प्रतिस्थापित करने की ओर अग्रसर होना इंगित करता है।

       जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त करने का आरोप-प्रत्यारोप एक दल, दूसरे दल पर आये दिन लगाता रहता है किन्तु रिश्वत लेने व देने के लिये निर्मित भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत अपेक्षित कार्यवाही करने या कराने की पहल किसी भी दल द्वारा नहीं की जाती है। राजनीतिक दलों का यह आचरण भारत की जनता को यह संदेश देता हैं कि कोई भी दल भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रध्दा और निष्ठा नहीं रखता है और न ही संसद द्वारा बनाये गये किसी कानून के अनुपालन में उनकी स्वयं की कोई रूचि ही है।

       भारत देश में संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून का शासन है जो देश के प्रत्येक राजनीतिक दल, दल के पदाधिकारी, प्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं नागरिक पर बिना किसी भेदभाव के समान रूप से प्रभावी है। किन्तु आये दिन देखने में यह आ रहा है कि कोई भी राजनीतिक दल संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून का पालन नहीं करना चाहता है तथा संवैधानिक विधि द्वारा निर्मित व स्थापित कानून को कानून मानने के लिये तैयार नहीं है।

प्रत्येक राजनीतिक दल स्वविचारित विचार को ही कानून की संज्ञा देकर, जनहित के नाम पर, अपने-अपने दलों की श्रेष्ठता व महत्ता को प्रतिष्ठित व प्रतिपादित करने के लिये आये दिन समूचे देश में हड़ताल, बाजार बंदी, चक्काजाम, तोड़-फोड़, लूटपाट, दंगाफसाद, धार्मिक उन्माद, बम विस्फोट आदि अनेकानेक भिन्न-भिन्न विद्यटनात्मक तथा हिंसात्मक तरीके अमल में लाते हुये राष्ट्रीय सम्पत्तियों को क्षति तथा देश की आम जनता को जन-धन की हानि पहुचाने जैसी गतिविधियों में संलग्न रहता है। दलबंदी के इस आचरण से देश में भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार और महगांई में आये दिन उत्तरोत्तर वृध्दि होती जा रही है। राजनीतिक दलों का यह आचरण जनतंत्र की हत्या कर, दल तंत्रीय राष्ट्र्र्र की स्थापना किये जाने का द्योतक है।

      इसलिये दलतंत्र भगाओं - जनतंत्र बचाओं अभियान का दीप प्रज्वलित करना आज के समय की प्रासंगिकता है।

       दल तंत्र को भगाना और जनतंत्र को बचाना हमारे अभियान का लक्ष्य है। लक्ष्य प्राप्ति के चार कारक है 1. निष्ठा 2. श्रम 3. कर्म 4. साधना। यदि आप देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत है और अपनी स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाये रखने हेतु संकल्पित, देश पर अपनी जान न्यौछावर करने हेतु तत्पर, किसी भी प्रकार के लालच से परे, निष्ठा के धनी, श्रम को समर्पित, कर्म के पुजारी और साधना के साधक है तो इस अभियान को गति प्रदान करने में अपना योगदान दे सकते है।

      दलतंत्र भगाओ - जनतंत्र बचाओं अभियान के दीप - प्रज्जवन का प्रथम चरण, हमारा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मुरैना विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना था। इस कार्य के लिये हमें किसी भी प्रकार के धनबल व बाहुबल की कतई दरकार नहीं रही। हमने सिर्फ मतदाता के जनमत समर्थन को शीर्ष प्राथमिकता दी। हम यह अच्छी तरह जानते है कि दलतंत्र का खात्मा धनबल या बाहुबल से नहीं किया जा सकता है। दल तंत्र का खात्मा केवल जनमत से ही हो सकता है।

भारत देश के वासियों एवं मतदाताओं से अभियान की यह अपील है कि दलतंत्र को भगाकर जनतंत्र को बचाने के लिये भारत का प्रत्येक मतदाता भावी चुनावों (लोकसभा/विधानसभा/स्थानीय संस्थाओं के चुनाव) में अपने अपने निर्वाचन क्षेत्र में अपना वोट दलों के किसी भी प्रत्याशी को न देकर केवल निर्दलीय प्रत्याशियों को ही अपना वोट दे। एवं दल तंत्र भगाओं - जनतंत्र बचाओं अभियान को सफल बनाने में अपनी महती  भूमिका निर्वहन करें।

 

     अपीलार्थी

   गोपाल दास गर्ग

      संयोजक

                               दलतंत्र भगाओ- जनतंत्र बचाओ अभियान

                                       गणेशपुरा, मुरैना म0प्र

07532-227836

 

उत्तर प्रदेश में महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने एंव न्याय दिलाने सम्बन्धी विवरण

उत्तर प्रदेश में महिलाओं के उत्पीड़न को रोकने एंव न्याय दिलाने सम्बन्धी विवरण

महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक एवं शारीरिक शोषण सम्बन्धी अपराधों तथा उनके उत्पीड़न को त्वरित गति से रोकने एवं न्याय दिलाने के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु शासन द्वारा अपराध शाखा, अपराध अनुसंधान विभाग ,0प्र0 लखनऊ के अन्तर्गत दिनांक 2/10/88  को महिला सहायता प्रकोष्ठ की  स्थापना की गयी ।

महिला सहायता प्रकोष्ठ अपराध शाखा, अपराध अनुसंधान विभाग, एक अपर पुलिस अधीक्षक के अधीन कार्यरत है, जिसके जोनल कार्यालय जनपद, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, बरेली तथा मेरठ है। इन जोनल कायालयों में सहवर्ती स्टॉफ सहित एक पुलिस उपाधीक्षक के पद स्वीकृत है। महिला सहायता प्रकोष्ठ, अपराध अनुसंधान विभाग के मुख्य कर्तव्य निम्नवत् है:-

(1)    महिला उत्पीड़न के अभियोगो/प्रकरणों के संबंध में पुलिस कर्मचारियों का मार्गदर्शन करना एवं जनपदीय पुलिस कार्यवाही का अनुश्रवण एवं आकलन करना और इस कार्य के लिए आवश्यक सूचना, विवरणों को प्राप्त/संकलित करना।

(2)    कतिपय महत्वपूर्ण प्रकरणों की जॉच/विवेचना ।    

(3)    पुलिस जन/अधिकारियों को महिला उत्पीडन एवं महिलाओं के अधिकारों/संरक्षण से सम्बन्धित कानूनों, नियमों आदि की जानकारी देना ।

(4)    उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को विभिन्न प्रकार की सहायता/सम्बल उपलब्ध कराने में योगदान देना।

(5)    महिला उत्पीड़न सम्बन्धी सामाजिक चेतना विकसित करने के लिए समाज सेवी संगठनों/व्यक्तियों के सहयोग से कार्यवाही करना। सम्पूर्ण प्रदेश में 11 जनपदों यथा लखनऊ, कानपुर नगर, वाराणसी, आगरा, इलाहाबाद, मेरठ, बरेली, मुरादाबाद, झाँसी, गोरखपुर तथा फैजाबाद में शासन द्वारा एक-एक महिला थाने की स्थापना की गयी है। इन महिला थानों का कार्य महिला स्टॉफ द्वारा ही किया जाता है। समय-समय पर महिला सहायता प्रकोष्ठ, अपराध अनुसंधान विभाग के राजपत्रित अधिकारियों द्वारा इन थानो का निरीक्षण किया जाता है तथा उचित मार्गदर्शन किया जाता है। वहॉ पर महिला प्रकोष्ठ स्थापित है, जहॉ पर शिकायत कर्ता अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इन महिला प्रकोष्ठों का संचालन सम्बन्धित जनपदों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक द्वारा किया जाता है ।

     

इसके अतिरिक्त अपराध अनुसंधान विभाग, 0प्र0 के महिला सहायता प्रकोष्ठ के अधीन केन्द्रीय समाज कल्याण बोर्ड, नई दिल्ली की स्वीकृत योजना के अन्तर्गत उ0प्र0 राज्य समाज कल्याण सलाहकार बोर्ड लखनऊ के सहयोग से एक परिवार परामर्श केन्द्र की स्थापना भी दिनांक 31-12-1993 से की गयी है। यह परिवार परामर्श केन्द्र परिवारों को टूटने से बचाने के लिए समुचित योगदान दे रहा है। आवश्यकतानुसार निर्बल महिलाओं को राज्य नि:शुल्क कानूनी सहायता समिति, जवाहरभवन, लखनऊ को सन्दर्भित करके उनकी नि:शुल्क कानूनी सहायता भी आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध करायी जाती है।

     

माननीय उच्चतम न्यायालय ने रिट पिटीशन (क्रिमिनल) संख्या 362/93 जिला डोमेस्टिक वर्किग वूमेन्स फोरम बनाम यूनियन आफ इण्डिया में पारित बलात्कार से पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता व क्षतिपूर्ति दिये जाने सम्बन्धी निर्देश दिये हैं। तत्कालीन पुलिस महानिदेशक, 0प्र0 श्री विजय शंकर माथुर द्वारा अपने अर्धशास0 पत्रांक:डीजी-सात-107(102)94 दिनांक 16-1-95 द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय की छायाप्रति समस्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक को प्रेषित करते हुए उक्त निर्देशो का अनुपालन करने हेतु निम्नलिखित कार्यवाही सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये गये थे :-

 

(1)    बलात्कार से पीड़ित महिलाओं को अधिवक्ता की सहायता उपलब्ध कराई जाय, जो न्यायालय में की जाने वाली कार्यवाही के अतिरिक्त यह भी परामर्श दे सके कि उसे विभिन्न इकाइयों से किस प्रकार की सहायता प्राप्त हो सकती है। यह आवश्यक है कि थाना स्तर पर जिस अधिवक्ता द्वारा पीड़ित महिला को सहायता प्रदान की जाय, वही अधिवक्ता न्यायालय में होने वाली कार्यवाही के समापन तक इस कार्य हेतु सम्बध्द रहे।

 

(2)    बलात्कार से पीड़ित महिला के थाने पर आने के समय ही उसे कानूनी सहायता उपलब्ध करा दी जाय, ताकि उसका कथन अंकित करते समय उसे अधिवक्ता की सहायता व मार्गदर्शन उपलब्ध रहे।

 

(3)    पीड़ित महिला से पूछ-ताछ करने के पूर्व उसे यह अवगत करा दिय  ाय कि उसे अधिवक्ता की सहायता लेने का अधिकार प्राप्त हैं। केस डायरी में इस तथ्य का उल्लेख किया जाय कि पीड़ित महिला का कथन लेने के पूर्व उसे अपने अधिकार के संबंध में अवगत करा दिया गया था।

 

(4)    प्रत्येक थाने पर ऐसे अधिवक्ताओं की सूची रखी जाय जो पीड़ित महिलाओं को कानूनी सहायता प्रदान करने हेतु तैयार हों, ताकि यदि पीड़ित महिला का पक्ष प्रस्तुत करने के लिए उसका कोई अपना अधिवक्ता नहीं है, तो सूची में अंकित अधिवक्ता से उसे कानूनी सहायता प्राप्त करा दी जाय।

 

(5)    इन अधिवक्ता की नियुक्ति पुलिस के प्रार्थनापत्र पर न्यायालय द्वारा की जायेगी, परन्तु पीड़ित महिला से पूछ-ताछ में विलम्ब न हो, इस उद्देश्य से न्यायालय की अनुमति से पूर्व थाना स्तर पर कार्यवाही करने हेतु अधिवक्ताओ को अधिकृत किया जायगा ।

 

(6)    बलात्कार से पीड़ित महिलाओ के नाम, पते एवं अभिज्ञान, जहॉ तक सम्भव हो, गोपनीय रखा जाय।

 

(7)    बालात्कार सम्बन्धीे अपराधो की विवेचना प्राथमिकता के आधार पर एक माह के अन्दर सम्पन्न कर ली जॉय।

 

(8)    प्रत्येक अपराध गोष्ठी में बलात्कार सम्बन्धी अपराधों की विवेचनाओं का अनुश्रवण किया जाय एवं विवेचनाओं में अनुचित विलम्ब करने वाले दोषी विवेचको के विरूद्व प्रभावी कार्यवाही की जाय।

 

इसके  अतिरिक्त समय-समय पर कार्यशाला/प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर पुलिस अधिकारियों को मानवाधिकार आयोग व प्रदेश सरकार द्वारा निर्गत दिशा-निर्देशो, विधिक प्रावधानों के सम्बन्ध में जानकारी देते हुए संवेदनशील व जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा हेै तथा अनैतिक देह व्यापार(निवारण) अधिनियम 1956 को लागू करने पर सर्वाधिक जोर दिया गया तथा तलाशी के दौरान वेश्यालयों अथवा इस प्रकार के अड्डो से पकड़े गये पुरूषो व महिलाओ/लड़कियो में से महिलाओ व लड़कियों को अपराधी के बजाय उत्पीड़ित समझते हुए अग्रिम कार्यवाही किये जाने के निर्देंश दिये गये। शासन के गृह (पुलिस) अनुभाग-15 से जारी पत्र संख्या-01/6-पु-15/04-00-20/2001 दिनांकित 30-7-2004 द्वारा प्रदेश के समस्त जिला अधिकारियों तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षकों को निर्देंश दिया गया है कि अनैतिक देह व्यापार में संलिप्त होने की दशा में पकड़े जाने वाले व्यक्तियों को आई0पी0सी0 की धाराओं के साथ-साथ अनैतिक देह व्यापार (निरोधक) अधिनियम,1956 की धाराओं में भी अपराध पंजीकृत कर विवेचना की जाय। इससे संबंधित अधिनियम में उपलब्ध दण्ड प्रावधानो का समुचित उपयोग हो सकेगा एवं उद्देश्यो की पूर्ति हो सकेगी ।     

 

कुतुब मीनार नहीं झुक रही है

कुतुब मीनार नहीं झुक रही है

नई दिल्‍ली 20 नवम्‍बर 09

राज्य सभा

 

       योजना तथा संसदीय कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री वी. नारायणसामी ने आज एक लिखित उत्तर में राज्य सभा में जानकारी दी कि कुतुब मीनार नहीं झुक रही है । उन्होंने बताया कि  भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण के आदेश पर कुतुब मीनार के सीधे खड़े होने का अध्ययन करने के लिए भारतीय सर्वेक्षण ने वर्ष 2005 में इसका भूगणितीय सर्वेक्षण किया । पिछले वर्ष भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण को सौंपी गयी अपनी रिपोर्ट में भारतीय सर्वेक्षण ने किसी झुकाव का निष्कर्ष नहीं निकाला है । तथापि, उच्च बारम्बारता डेटा एकत्र करने के लिए इसके द्वारा दिए गए परामर्श के अनुसार भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण ने भारतीय सर्वेक्षण को प्रति वर्ष कुतुब मीनार का भूगणितीय सर्वेक्षण करने का कार्य सौंपा है ।

 

 

पॉलिमर के करंसी नोट

पॉलिमर के करंसी नोट

नई दिल्‍ली 20 नवम्‍बर 09

लोक सभा

        

       सरकार ने बैंक नोटों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए प्रायोगिक आधार पर 10 रूपए के 1 अरब पॉलिमर नोट जारी करने की घोषणा की है। भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रायोगिक आधार पर यह पॉलिमर के नोट चलाने की पहल की है। शुरू में  10 रूपए के नोट ही मॉलिमर के होंगे क्योंकि दस रूपए के नोटों में नकली नोटों की आशंका बहुत कम है।

 

       यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री श्री नमो नारायण मीणा ने आज लोक सभा में एक प्रश्न के लिखित जवाब में दी ।

 

पकड़े गये जाली नोटों की संख्‍या

पकड़े गये जाली नोटों की संख्‍या

नई दिल्‍ली 20 नवम्‍बर 09

लोकसभा

 

       वित्त राज्य मंत्री श्री नमो नारायण मीना ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोकसभा को आज सूचित किया कि मुद्रा प्रबंधन के गतिशील तत्त्वों का अध्ययन करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 1988 में नाइक समिति गठित की गई थी। समिति ने नकली नोटों के बारे में कोई अध्ययन नहीं किया।

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत की गई सूचना के अनुसार विगत तीन वर्षों के दौरान बरामद किए गए और जब्त किए गए जाली करेंसी नोटों की कुल संख्या निम्नलिखित है-

 

वर्ष

 

मूल्यवर्ग

 

 

1000 रुपये

 

500 रुपये

 

100 रुपये

 

50 रुपये

 

20 रुपये

 

10 रुपये

 

2006

 

19,606

 

81,399

 

2,20,419

 

30,570

 

1,392

 

3,653

 

2007

 

21,130

 

1,22,858

 

2,23,505

 

19,778

 

834

 

349

 

2008

 

59,631

 

3,49,380

 

2,20,233

 

31,257

 

604

 

269

 

2009

(30.9.09)

28,916

 

1,64,252

 

1,25,856

 

10,370

 

438

 

149

 

 

       भारतीय रिजर्व बैंक ने सूचित कि है किया बैंक-वार और स्थान-वार अभियोजन और दोषसिध्दि की सूचना का रिकार्ड नहीं रखा जाता। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो ने बताया कि उनके पास भी इस प्रकार की सूचना उपलब्ध नहीं है।

 

       देश में नकली भारतीय करेंसी नोटों के परिचालन को रोकने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपायों में नकली नोटों की तस्करी रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल और सीमा शुल्क प्राधिकारियों द्वारा सतर्कता बढाना, प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए सुरक्षा विशेषताओं संबंधी सूचना का प्रसार करना और बैंकों के सभी प्रधान कार्यालयों में नकली नोट सतर्कता प्रकोष्ठों की स्थापना करना शामिल हैं। नकली नोट बनाना बहुत मुश्किल करने के लिए 2005 में बैंक नोटों में अतिरिक्त सुरक्षा विशेषताओं को शामिल किया गया है। बैंक नोटों की सुरक्षा को और सुदृढ बनाने के लिए नवीनतम सुरक्षा विशेषताओं के समावेशन की प्रक्रिया चल रही है। नकली भारतीय करेंसी नोटों के परिचालन की मानीटरी करने और उनका परिचालन रोकने के लिए केन्द्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है जिसमें केन्द्रीय एजेंसियों के अधिकारी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। राज्यों में भी इसी तरह के निकाय स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा, भारत सरकार ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो को नकली करेंसी नोटों के मामलों की जांच-पड़ताल की मानीटरी करने के लिए एक नोडल एजेंसी के तौर पर नामजद किया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने नकली नोटों का पता लगाने के तंत्र को भी सुदृढ क़िया है।

 

 

झारखंड चुनाव में रूकावट डालने पर आमादा सीपीआई माओवादियों की निंदा करें

नागरिक समाज संगठनों का आग्रह

झारखंड चुनाव में रूकावट डालने पर आमादा सीपीआई माओवादियों की निंदा करें

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नई दिल्‍ली 20 नवम्‍बर 09

       झारखंड में चुनाव की घोषणा की जा चुकी है, उधर सीपीआई माओवादी चुनाव में गड़बड़ी पैदा करने पर आमादा हैं। उन्होंने चुनाव का बहिष्कार करने का लोगों से आग्रह किया है और इसके लिए धमकी भी दी है।

       पिछले वर्षों की ही तरह माओवादी सार्वजनिक सम्पत्ति को तहस-नहस करने के लिए धमकियां दे रहे हैं। 6 नवम्बर, 2009 को उन्होंने एकौना, चतरा जिला में एक विद्यालय की इमारत को ध्वस्त कर दिया। 10 नवम्बर, 2009 को उन्होंने कोने और बनबिरवा (लातेहार जिला)  में और 15 नवंबर, 2009 में सिंहभूम जिला में डिम्बुली में पंचायत भवन की निर्माणाधीन इमारत को ध्वस्त कर दिया। कल, 19 नवंबर 2009 को मार्क्सवादी कम्युनिस्टों ने मनोहरपुर और पुसइता रेलवे स्टेशनों के बीच रेल मार्ग को बम विस्फोट से उड़ा दिया। इस कारण दो बोगियां उड़ गई और दो पटरी से उतर गईं। एक यात्री मारा गया और 40 यात्री घायल हो गये।

       सार्वजनिक सम्पत्ति नष्ट करने के अलावा उन्होंने कई मासूम लोगों को 'भेदिया' बताकर मारना जारी रखा।

       सरकार ने हिंसा की इस कारर्वाइयों की निंदा की है। झारखंड सरकार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करने के लिए कटिबध्द है। मार्क्सवादी कम्युनिस्टों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी ताकि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न हो सकें। गृह मंत्रालय को विश्वास है कि झारखंड के लोग मार्क्सवादी कम्युनिस्टों की चुनौती का सामना करेंगे और भारी संख्या में वोट देकर चुनाव को सफल बनाएंगे।

 

भारत को दी जाने वाली नाभिकीय प्रौद्योगिकी पर प्रतिबंध

भारत को दी जाने वाली नाभिकीय प्रौद्योगिकी पर प्रतिबंध

नई दिल्‍ली 20 नवम्‍बर 09

राज्य सभा

 

       विदेश राज्य मत्री श्रीमती प्रनीत कौर ने आज राज्य सभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि ला आकिला शिखर सम्मेलन में जी-8 देशों ने अप्रसार पर एक वक्तव्य स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि जी-8 ब्लॉक के साथ भारत का कोई असैनिक नाभिकीय करार नहीं है । भारत को एनएसजी सदस्यों के साथ असैनिक परमाणु सहयोग में शामिल किए जाने हेतु स्पष्ट छूट प्रदान करने से संबंधित 6 सितम्बर, 2008 के एनएसजी के निर्णय में परिकल्पित है, सरकार ने असैनिक परमाणु सहयोग से जुड़े सभी पहलुओं के संबंध में एनएसजी के साथ विचार-विमर्श किया है । उन्होंने बताया कि होक्कयदो तोयाको में और पूर्व के शिखर सम्मेलनों के समान ही हम स्वीकार करते हैं कि सामूहिक विनाश के हथियार और उनकी डिलीवरी के साधन अभी भी वैश्विक चुनौती और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़े खतरे बने हुए हैं । अप्रसार और नि:शस्त्रीकरण लक्ष्यों को बढावा देने के लिए वर्तमान अवसरों और नई गतिशीलता का उपयोग करने के लिए कृतसंकल्प हैं ।

 

       भारत इस बात पर बल देता है कि एनपीटी अभी भी परमाणु अप्रसार व्यवस्था का प्रमुख तत्व है और परमाणु निशस्त्रीकरण के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अनिवार्य आधारशिला है और हम अप्रसार, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग तथा निशस्त्रीकरण जैसी तीन आधारशिलाओं के उद्देश्यों को दायित्वों के प्रति अपनी पूर्ण वचनबध्दता को दोहराते हैं । हम लोग मिलकर यह कार्य करेंगे, जिससे कि वर्ष 2010 में आयोजित होने वाला एनपीटी समीक्षा सम्मेलन इस संधि की व्यवस्थाओं को संवर्धित करे और संधि की सभी आधारशिलाओं के संदर्भ में व्यावहारिक और प्राप्त किए जाने योग्य लक्ष्य निर्धारित किए जा सकें । भारत संयुक्त राज्य अमरीका के राष्ट्रपति द्वारा दी गयी इस घोषणा का स्वागत करता है कि उन्होंने व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) का अनुसमर्थन करने का प्रयास कराने का निर्णय लिया है और हम अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा रूपरेखा के एक प्रधान उपकरण और अप्रसार तथा नि:शस्त्रीकरण के एक महत्त्वपूर्ण उपाय के रूप में सीटीबीटी को शीघ्र लागू करने और इसे सार्वभौमिक स्वरूप प्रदान करने के लिए किए जाने वाले अपने प्रयासों में तेजी लाएंगे । भारत सभी संबंधित राष्ट्रों से परमाणु हथियार परीक्षण विस्फोटों तथा अन्य प्रकार के परमाणु विस्फोटों पर स्थगन लगाने का आहवान करता है । भारत एक सुरक्षित विश्व बनाने और परमाणु हथियारों से मुक्त विश्व के लिए माहौल सृजित करने के प्रति प्रतिबध्द है ।

 

       भारत अप्रसार संधि के सभी पक्षकार राष्ट्रों का, उनके सभी संधि दायित्वों के अनुरूप परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग करने के उनके अक्षुण्ण अधिकारों की पुष्टि करता है । भारत ने ईरान के परमाणु मुद्दे पर व्यापक, शांतिपूर्ण व राजनयिक समाधान के लिए कार्य करने की अपनी वचनबध्दता को दोहराया है और वार्ता के माध्यम से इसका समाधान करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भारत जोरदार समर्थन करता है ।  भारत ने 25 मई, 2009 को कोरिया लोकतांत्रिक जन गणराज्य (डीपीआरके) द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण की कड़े शब्दों में निंदा की है और कहा है कि यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प का घोर उल्लंघन है । ऐसे परीक्षण से क्षेत्र में और इसके बाहर शांति और स्थिरता को धक्का पहुंचता है ।

 

       आतंकवादियों द्वारा डब्ल्यू एम डी प्राप्त करने का खतरा हमारी गंभीर चिन्ता का कारण बनी हुई है । भारत ने एक साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया है ताकि आतंकवादियों को कभी भी वे हथियार और संबंधित सामग्री सुलभ न हो सकें । जी 8 ऐसे क्षेत्रों में  सहयोग के नए क्षेत्रों को शामिल करने के लिए भी तैयार है जहां आतंकवाद और प्रसार के खतरे सर्वाधिक हैं । खास तौर पर वैज्ञानिकों के सहयोग के माध्यम से वैश्विक डब्ल्यूएमडी ज्ञान प्रसार को रोकने के लिए हम इस क्षेत्र में एक समन्वित दृष्टिकोण अपनाये जाने हेतु सिफारिशों का स्वागत करते हैं ।

 

       भारत ने नाभिकीय सुरक्षा के संबंध में चेरनोबिल स्थल पर चल रही परियोजनाओं में पिछली शिखर बैठक के बाद की प्रगति के बारे में बताया है कि उस बैठक के बाद से हुई प्रगति को स्वीकारते हैं और यह नोट करते हुए कि उन्हें सम्पन्न किए जाने के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी, हम अपनी इस वचनबध्दता को दोहराते हैं कि हम उस स्थान को स्थायी और पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित स्थान में परिवर्तित करने के लिए उक्रेन के साथ मिलकर संयुक्त प्रयास करेंगे ।

 

 

गोवा में चालीसवें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में वहीदा रहमान और ममूटी होंगे मुख्य अतिथि

गोवा में चालीसवें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में वहीदा रहमान और ममूटी होंगे मुख्य अतिथि

New Delhi 19 November 2009

जानी मानी फिल्म अभिनेत्री वहीदा रहमान और फिल्म अभिनेता ममूटी चालीसवें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में मुख्य अतिथि होंगे। यह फिल्म समारोह गोवा में 23 नवंबर 2009 से शुरू हो रहा है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्रीमती अंबिका सोनी उद्धाटन समारोह में मौजूद रहेंगी। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त अभिनेता कबीर बेदी और जानी मानी कलाकार दिव्या दत्ता उद्धाटन समारोह के सूत्रधार होंगे।

       अंतर्राष्ट्रीय खण्ड में विश्व सिनेमा शामिल है जिसमें 45 देशों की 55 फिल्में दिखाई जाएंगी। विदेश खण्ड के एक और महत्त्वपूर्ण घटक में जाने माने निर्देशकों का सिंहावलोकन किया जाएगा। इस बार महाद्वीप खण्ड में लातिन अमरीका शामिल होगा। समारोह में क्रोएशिया, इटली, पोलैण्ड, इस्टोनिया और फ्रांस इस बार देश खण्ड में शामिल होंगे।

       भारतीय पनोरमा खण्ड में 26 फीचर फिल्में और 18 अन्य फिल्में दिखाई जाएंगी। श्रध्दांजली खण्ड में वर्ष 2008 के फिल्म समारोह के बाद से दिवंगत 13 फिल्मी हस्तियों को स्मरण किया जाएगा। असम सिनेमा के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष खण्ड में पांच फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।  उद्धाटन समारोह की मुख्य अतिथि मशहूर अभिनेत्री वहीदा रहमान होंगी जबकि          मलयालम सिने अभिनेता ममूटी 3 नवंबर, 2009 को समापन समारोह के मुख्य अतिथि होंगे।

 

 

विदेशी कंपनियों के लिए विधिक क्षेत्र को खोलना

विदेशी कंपनियों के लिए विधिक क्षेत्र को खोलना

New Delhi 19 November 2009

लोकसभा

       भारत सरकार के पास भारतीय विधिक क्षेत्र को विदेशी विधिक कंपनियों के लिए खोलने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हालांकि विदेशी विधिक कंपनियों को विदेशी विधियों पर विधिक सहायता तथा सलाह के लिए अपने कार्यालय खोलने के मामले पर भारतीय अधिवक्ता परिषद (बार काउन्सिल ऑफ इंडिया) सहित सभी हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। इस संबंध में उच्च न्यायालय में एक मामला लंबित है।

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री वीरप्पा मोइली ने लोकसभा में पूछे गये एक प्रश्न के लिखित उत्तार में यह जानकारी दी।

 

पर्यावरण अदालतों की स्थापना

पर्यावरण अदालतों की स्थापना

New Delhi 19 November 2009

लोकसभा

सरकार ने 31 जुलाई, 2009 को लोकसभा में राष्ट्रीय हरित अधिकरण विधेयक, 2009 पेश किया था, जोकि वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा से संबंधित मामलों के शीघ्र तथा प्रभावी निपटारे के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) पर जोर देता है।

 

यह जानकारी केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री वीरप्पा मोइली ने लोकसभा में पूछे गये एक प्रश्न के लिखित उत्तार में दी।

 

 

18 लाख की लागत से बनेगा ग्राम न्यायालय, 193 ग्रामों में होगें स्थापित

18 लाख की लागत से बनेगा ग्राम न्यायालय, 193 ग्रामों में होगें स्थापित

New Delhi 19 November 2009

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री वीरप्पा मोइली ने आज लोक सभा में पूछे गये एक प्रश्न के लिखित उत्तार में बताया कि वर्ष 2009-10 में उन राज्यों में जहां ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 लागू होता है, एक सौ तिरानवे ग्राम न्यायालयों की स्थापना किये जाने की संभावना है। इसके लिए सरकार प्रति न्यायालय 18 लाख रुपये अनावर्ती खर्च करेगी। इसके अलावा सरकार पहले तीन वर्षों के दौरान एक ग्राम न्यायालय की आवर्ती खर्च का 50 प्रतिशत यानि 6 लाख 40 हजार रुपये की राशि का भी वहन करेगी।

मंत्री महोदय ने बताया कि ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 के क्रियान्वयन से राज्यों में न्याय प्रशासन पर पड़ने वाले प्रभावों के संबंध में राज्य सरकारों, उच्च न्यायालयों तथा अन्य पणधारियों के साथ सरकार ने विस्तार से विचार-विमर्श किया है।

 

ग्वालियर के पूर्व कलेक्टर विजय सिंह संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य नियुक्त

ग्वालियर के पूर्व कलेक्टर विजय सिंह संघ लोक सेवा आयोग के सदस्य नियुक्त

New Delhi 19 November 2009

पूर्व रक्षा सचिव श्री विजय सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग में सदस्य का पदभार ग्रहण कर लिया है। आयोग के अध्यक्ष प्रो0 डी.पी. अग्रवाल ने आज उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

श्री विजय सिंह मध्यप्रदेश संवर्ग के 1970 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी है। अपनी 37 वर्ष की सेवा के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार तथा मध्यप्रदेश सरकार के अनेक महत्तवपूर्ण पदों पर कार्य किया। अगस्त, 2007 में रक्षा सचिव बनने से पहले उन्होंने केंद्र सरकार के संस्कृति विभाग में निदेशक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव, वाणिज्य मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा वित्ता मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पदों पर कार्य किया। अक्टूबर, 2004 से जनवरी, 2006 तक वे मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव थे। उसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार में आयुष विभाग  और सड़क परिवहन तथा राजमार्ग विभाग में सचिव रहने के बाद रक्षा सचिव अगस्त, 2007 में बने थे।

 

 

अमरसिंह को भारी पड़ सकती है उनकी लफ्फ़ाजी

अमरसिंह को भारी पड़ सकती है उनकी लफ्फ़ाजी

निर्मल रानी, 163011, महावीर नगर,  अम्बाला शहर,हरियाणा

email: nirmalrani@gmail.com फोन-0171-2535628

              फिल्मी गीताें व फ़िल्मी गंजलों के मुखड़ों को संवाद दाताओं के  प्रश्नों के उत्तर के रूप में पेश करने में महारत रखने वाले समाजवादी पार्टी नेता अमरसिंह को आने वाले दिन भारी पड़ने की संभावना नंजर आ रही है। यूं तो अमरसिंह समाजवादी पार्टी के महासचिव पद पर विराजमान हैं।परंतु दरअसल उनका कार्य समाजवादी पार्टी के लिए जनसंपर्क अधिकारी के रूप में कार्य करने का है। फ़ि ल्म जगत के प्रमुख चेहरों को समाजवादी पार्टी से जोड़ने का श्रेय भी अमरसिंह को ही जाता है। अमिताभ बच्चन,अनिल अंबानी तथा सुब्रतोराय सहारा जैसी देश की अतिविशिष्ट शख्सियतों को मुलायम सिंह के ंकरीब  लाने का श्रेय भी इन्हीं के सिर पर है। अब समाजवादी पार्टी के हित के लिए इतनी बड़ी शख्सियतों को जोड़ने के लिए अमर सिंह को स्वयं क्या कुछ करना पड़ता है यह एक अलग सी बात है। कभी अमरसिंह की पार्टी के प्रमुख नेता रहे राजबब्बर तथा आंजम खां जैसे लोग इस विषय पर ज्यादा बेहतर रौशनी डाल सकते हैं।

              जहां समाजवादी पार्टी के देश की बड़ी शख्सियतों से  संबंध मधुर बनाने में अमरसिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है वहीं समाजवादी पार्टी छोड़कर जाने वाले नेतागण भी अमर सिंह को ही अपने मनमुटाव का मुख्य कारण बताते हैं। पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कुछ ऐसे तथ्य उजागर किए गए जिनसे यह संकेत मिलता हैकि अमरसिंह ने समाजवादी पार्टी के उत्तरप्रदेश में सत्ता में रहते हुए शासन का किस प्रकार दुरुपयोग किया था। इस संबंध में जांच भी शुरू हो चुकी है। ऐश्वर्या राय के नाम पर कालेज खोलने को लेकर ंजमीन संबंधी उपजे विवाद में अमिताभ बच्चन का नाम आने की जड़ ंमें भी अमरसिंह की ही महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां तक कि अंबानी बंधुओं के मध्य मतभेद बढाने में भी इन्हीें का नाम लिया जा रहा है। इन सभी उतार-चढावों के बीच जब कभी मीडिया अमरसिंह से कुछ पूछना चाहता है तो अमरसिंह कभी ंफरमाते हैं कि हमें तो लूट लिया मिल के हुस्न वालों ने और कभी कहते हैं मतलब निकल गया है तो पहचानते नहीं। अमरसिंह का मीडिया प्रेम भी जगंजाहिर है। पिछले दिनों अपने एक आप्रेशन के दौरान सिंगापुर के हास्पिटल में बीमारी की हालत में  एक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से लखनऊ में बैठे पत्रकारों से उन्होंने बातचीत की।

              परंतु ऐसा लगता है कि अब अमरसिंह पर संकट के बादल मंडराने शुरू हो चुके हैं। उनके फ़ि ल्मी गीतों के मुखड़े बोलते रहने का समय अब जाने वाला लगता है। ऐसा माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की निरंतर गिरती जा रही साख के लिए भी अमरसिंह को ही ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा 6 दिसंबर 1992 की अयोध्या घटना के मुख्य अभियुक्त कल्याण सिंह को समाजवादी पार्टी के ंकरीब लाने के  ंफैसले के भी आप ही ंजिम्मेदार हैं। अमरसिंह ने यह राजनैतिक सपना मुलायम सिंह को दिखाया था कि मुस्लिम व यादव मतों पर हमारा अधिकार तो है ही परंतु कल्याण  सिंह के  समाजवादी पार्टी के समर्थन से लोध तथा पिछड़ी जातियों के मत भी समाजवादी पार्टी के पक्ष में आएंगे। परंतु गत् लोकसभा चुनावों में अमरसिंह की गणित उल्टी पड़ गई। अपना भी जनाधार खोते जा रहे कल्याण सिंह की बदौलत न तो लोध व पिछड़े मतों का रुझान समाजवादी पार्टी की तरंफ हुआ और मुस्लिम मत भी कल्याण-मुलायम की बढ़ती दोस्ती के परिणामस्वरूप समाजवादी पार्टी से दूर होते सांफ नंजर आए।

              सोने पर सुहागा तो यह कि जिस कल्याण सिंह को मुस्लिम समुदाय ं  देखना भी पसंद नहीं करता उन्हें लेकर पिछले दिनों लखनऊ में हुए शहर पश्चिमी विधानसभा सीट के उपचुनाव के दौरान आपने एक ऐसी टिप्पणी कर डाली जिससे मुस्लिम समाज न केवल उनसे ख़ंफा हो गया बल्कि अमरसिंह के विरुद्ध शहर कोतवाली में धार्मिक भवनाओं को ठेस पहुंचाने संबंधी एक मुंकदमा भी दर्ज करवा दिया गया ।  4 नवंबर की इस घटना में अमरसिंह ने समाजवादी पार्टी के एक मुस्लिम प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने हेतु मुस्लिम समुदाय का आहवान् किया। एक सार्वजनिक सभा में कल्याण सिंह व मुलायम सिंह की दोस्ती को जायंज ठहराते हुए अमरसिंह ने ंफरमाया कि कल्याण सिंह समाजवादी पार्टी के लिए हंजरत हुर्र के समान हैं तथा भारतीय जनता पार्टी के लिए यह भस्मासुर की तरह हैं। अमरसिंह की यह टिप्पणी मुस्लिम समुदाय को बहुत नागवार गुंजरी तथा वे अमरसिंह के विरुद्ध मुंकदमा दर्ज करा बैठे।

              आईए संपेक्ष में आपको बताते हैं हंजरत हुर्र का जीवन चरित्र। छठवीं सदी में जब सीरियाई मुस्लिम शासक यंजीद ने हज़रत इमाम हुसैन के परिजनों को ंकत्ल करने की मंशा से करबला स्थित फु रात नदी के किनारे घेरा उस समय हुर ही यज़ीद की सेना का सेनापति था। हुर ने ही यंजीद के हुक्म पर हंजरत हुसैन व उनके परिवार के तंबुओं को नदी के किनारे से उखाड़  फेंका था तथा उन्हें पानी से दूर रहने के लिए इसलिए मजबूर किया था ताकि भीषण गर्मी के बावजूद उन्हें पानी नसीब न हो सके। 10 मोहर्रम की सुबह हुर को ही यंजीद के  सेनापति के रूप में हंजरत हुसैन व उनके सहयोगियों पर आक्रमण करना था।  परंतु 9-10 मोहर्रम की रात को यजीद का सेनापति हुर देर रात तक करवटें बदलता रहा। उसके जवान पुत्र तथा ंगुलाम ने जब हुर की बेचैनी का कारण पूछा तो उसने कहा कि यंजीद व हुसैन के मध्य सुबह से शुरू होने वाली लड़ाई सत्य तथा असत्य के बीच होने वाला युद्ध है। यंजीद क्रूर,दुष्ट,व्याभिचारी,दुराचारी तथा भ्रष्ट राजा है। परंतु शक्तिशाली है तथा दौलतमंद है। दूसरी ओर उसको मुस्लिम राजा के रूप में मान्यता प्रदान न करने वाले हंजरत हुसैन हंजरत मोहम्मद के सगे नाती हैं। वे सत्य व धर्म के सच्चे उपासक हैं । वे शक्ति में कमज़ोर भी हैं। ऐसे में एक ओर माल व दौलत, तरक्की तथा जागीर है तो दूसरी ओर शहादत,सच्चाई तथा स्वर्ग के द्वार। ऐसे में मैं यज़ीद की ओर से युद्ध करने के बजाए युद्ध की सुबह होने से पूर्व ही हंजरत हुसैन के चरणों में जाकर स्वयं को समर्पित करना चाहता हूं तथा उनसे मांफी भी मांगना चाहता हूं। हुर के पुत्र तथा ंगुलाम ने भी उनके इस ंफैसले का समर्थन किया तथा रातों रात यजीद का सेनापति हुर अपने पुत्र व ंगुलाम के साथ यंजीद की सेना को छोड़कर रात के अंधेरे में हंजरत हुसैन के चरणों में जा गिरा। हुसैन ने उसे मांफ किया। इतिहास साक्षी है कि  10 मोहर्रम को करबला में हुई लड़ाई में हंजरत हुसैन की ओर से शहीद होने वाले पहले तीन सैनिक यही थे। हुर की इस क़ुर्बानी के बाद ही उन्हें हंजरत हुर के  नाम से जाना गया।

              अब हंजरत हुर का चरित्र चित्रण सुनने के बाद क्या इसमें कोई ऐसी गुंजाईश नज़र आती है जिससे कि कल्याण सिंह की तुलना हंजरत हुर से की जा सके। हुर ने सच्चाई का साथ देने के लिए यंजीद का साथ छोड़ा था। परंतु कल्याण सिंह ने भाजपा इसलिए छोड़ी थी क्योंकि भाजपा ने उनके पुत्र को लोकसभा का टिकट देने से इंकार कर दिया था। दूसरी बात यह कि कल्याण सिंह पहली बार भाजपा से अलग नहीं हो रहे थे। इसके  पहले भी वे अटल बिहारी वाजपेयी के विषय में अनाप-शनाप बोले थे तथा पार्टी से निकाल दिए गए थे। यह दूसरा मौक़ा था जबकि कल्याण सिंह पार्टी से निकाले गए तथा उन्हें अकेला देखकर सपा जनसंपर्क अधिकारी अमरसिंह ने उनसे संपर्क साधा और न जाने किस समीकरण के तहत कल्याण सिंह, अमर सिंह को सपा के लिए लाभकारी नंजर आए और वह भी इतने कि उनमें अमरसिंह को हंजरत हुर सी समानता भी नंजर आने लगी।

              कल्याण सिंह द्वारा समाजवादी पार्टी को जो नुंकसान पहुंचा उसका सिलसिला केवल लोकसभा चुनावों तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश विधान सभा के हुए उपचुनावों में भी समाजवादी पार्टी की अच्छी ंफंजीहत हुई। यहां तक कि ंफिरोंजाबाद लोकसभा सीट के उपचुनाव में जहां कि सपा ने अपनी पूरी तांकत झोंक दी थी वहीं अमरसिंह के ही सबसे बड़े आलोचक समझे जाने वाले कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर ने मुलायम सिंह की बहुरानी डिंपल यादव को भारी मतों से पराजित कर दिया। ख़बर है कि इसी ंफिरोज़ाबाद की सीट की हार ने मुलायम ंसिंह यादव को यह चिंतन करने के लिए मजबूर कर दिया है कि अमरसिंह के ऐसे ंफैसले आगे और कब तक? उनकी लंफंफांजी और ंफिल्मी गीतों व ंगंजलों के मुखड़े अब और कब तक? ऐसे में आपका भी यह सोचना न्यायसंगत हो सकता है कि देश की राजनीति की छाती पर अमर सिंह जैसे लंफंफाज़ों की सवारी और कब तक?  निर्मल रानी