NARENDRA 的个人资料CHAMBAL KI AWAZ चम्बल की...照片日志列表更多 工具 帮助

CHAMBAL KI AWAZ चम्बल की आवाज़

WE ARE LOCAL INHABITANTS OF CHAMBAL VALLEY IN INDIA WANT TO SAY SOME THING ABOUT US.

अनमोल वचन

正在加载...正在加载...

लल्‍ला लल्‍ला लोरी दूध की कटोरी .....

  स्‍व. मुकेश जी का एक प्‍यारा सा गीत

YouTube - lala lala lori doodh ki katori
  

मंदिर मस्जिद गुरूद्वारे पर लड़ाई.... बच्‍चों का संदेश

 यह रणवीर कपूर की मॉं प्रसिद्ध अभिनेत्री नीतू सिंह हैं

YouTube - Bacche Mann ke Sachhe
  

संस्‍कृति भी ऑन लाइन होगी , कवियों साहित्‍यकारों के साथ एन.जी.ओ. की नेटवर्क भी ऑनलाइन होगी

संस्‍कृति भी ऑन लाइन होगी , कवियों साहित्‍यकारों के साथ एन.जी.ओ. की नेटवर्क भी ऑनलाइन होगी

मुरैना 28 नवम्‍बर 09, चम्‍बल की प्रसिद्ध स्‍वयंसेवी संस्‍था ‘’संस्‍कृति’’ भी शीघ्र ही ऑन लाइन होकर इण्‍टरनेट पर आ रही है । ग्‍वालियर टाइम्‍स समूह संस्‍कृति संस्‍था को ऑनलाइन करने की व्‍यापक तैयारीयां कर रहा है ।

संस्‍कृति की वेबसाइट इण्‍टरेक्टिव होगी तथा साहित्‍यकार, कवि एवं स्‍वयंसेवी संगठनों की विशाल नेटवर्क संस्‍कृति की वेबसाइट पर उपलब्‍ध होगी , साथ ही संस्‍कृति अपनी परियोजनाये, सूचना का अधिकार सहित कई अनेक चैनल उपलब्‍ध करायेगी ।

संस्‍कृति के निदेशक प्रसिद्ध कवि एवं साहित्‍यकार देवेन्‍द्र तोमर ग्‍वालियर टाइम्‍स समूह से जुड़कर संस्‍कृति संस्‍था के कार्यो की बृहद परियोजना बनाने में जुटे हैं ।  संस्‍कृति की वेबसाइट में चम्‍बल के ही नहीं बल्कि देश भर के साहित्‍यकारों व कवियों को उनकी रचनाओं के साथ एक जगह पर ही प्रकाशित किया जायेगा । और कई ख्‍यातनाम साहित्‍यकारों व कवियों की दुर्लभ कृतियां भी यहॉं पढ़ीं जा सकेगी ।  उनकी तथा स्‍वयंसेवी संस्‍थाओं की विशाल नेटवर्क एवं डायरेक्‍ट्री भी यहॉं मय वेबसाइट उपलब्‍ध होगी । जिसमें आनलाइन पंजीयन कराने से लेकर प्रकाशन प्रसारण वेब नेटवर्किंग जैसी सुविधायें तथा आटो अपडेशन एवं आटो पब्‍िलिशिंग की सुविधा भी दी जायेगी ।

ग्‍वालियर टाइम्‍स के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी एवं प्रधान संपादक नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’ वेब साइट की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं । इसके पश्‍चात चम्‍बल की करीब 16 अन्‍य स्‍वयंसेवी संस्‍थायें भी ऑन लाइन की जायेंगी । नरेन्‍द्र सिंह तोमर ‘’आनन्‍द’’ ने कहा है कि चम्‍बल के बारे में विश्‍व में व्‍याप्‍त भ्रांतियां दूर कर असल चम्‍बल से परिचित कराने के अपनी परियोजना के दूसरे चरण पर तथा ई कामर्स व ई गवर्नेन्‍स के तीसरे चरण को नेशनल नोबल यूथ अकादमी ने कार्य करना प्रारंभ कर दिया है । शीघ्र ही वे ग्‍वालियर चम्‍बल में एक विशेष अभियान छेड़ कर कार्यक्रम को गति देंगे ।

ग्‍वालियर टाइम्‍स ग्‍वालियर चम्‍बल के पत्रकारों, राजनेताओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों, चिकित्‍सकों, अभिभाषकों की डायरेक्‍ट्री भी शीघ्र ही ऑनलाइन करने जा रही है यह भी इण्‍टरेक्टिव होगी और इसमें भी आन लाइन पंजीयन, आटो अपडेशन व आटो पब्‍िलिशंग की सुविधा रहेगी ।    

 

अब अलग नही, साथ साथ रहेगें , लोक अदालत ने संवारा 4 दम्पत्तियों का जीवन

अब अलग नही, साथ साथ रहेगें , लोक अदालत ने संवारा 4 दम्पत्तियों का जीवन

भिण्ड 26 नवम्बर 2009

      वीते सप्ताह भिण्ड जिले में सम्पन्न वृहद लोक अदालत से 4 नव दम्पत्तियों का जीवन संवारा है। आपसी समझौते एवं वैवाहिक राजीनामा होने से दामपत्य जीवन से अलग होकर जीवन जीने वाले 4 उभय पक्षों के मध्य पुर्न जीवन स्थापना का मार्ग खुला है। जिला सत्र एवं न्यायाधीश तथा अध्यक्ष विधिक सेवा प्राधिकरण से विशेष प्रयासों से वर्ष 2007 में वैवाहिक जीवन की बागडोर संभालने वाले जितेन्द्र और गीता देवी तथा वर्ष 2009 में वैवाहिक गृहस्थ जीवन में प्रवेश करने वाले नव दम्पत्ति धर्मेन्द्र एवं पिंकी, सुरेन्द्र एवं सुषमा तथा संभू उर्फ प्रदीप और किरण उर्फ श्रूती विभिन्न कारणों से अलग अलग गृहस्थ जीवन जी रहे थे इनके जीवन में लोक अदालत के जरिए पुर्न जीवन स्थापना की नई सौगात आई है। सभी दम्पतियों ने   जिला न्यायाधीश हरीश चन्द्र शर्मा एवं अन्य न्यायाधीशों की सलाह को मानते हुये गृहस्थ जीवन साथ साथ जीने के मार्ग को स्वीकार किया।

 

आलेख : प्रकृति के सानिध्य में स्वस्थ जीवन

आलेख : प्रकृति के सानिध्य में स्वस्थ जीवन

ग्वालियर 25 नवम्बर 09। प्रकृति, प्रकृति हमारी माँ है। भगवान ने हमें बनाने से पहले प्रकृति बनाई। जिससे वह हमारी सुरक्षा (केयर) कर सके। जिस प्रकार एक बच्चे की सुरक्षा मां करती है।

      प्रकृति कभी बीमारी पैदा नहीं करती। मुनष्य अपनी गलत जीवन शैली, गलत भोजन, गलत आदत, गलत स्वभाव के कारण बीमार होता है। प्राकृतिक रूप में रहने वाले कोई भी जानवर कभी बीमार नहीं होते। जैसी जीवन शैली पशु पक्षिओ की होती है वैसा भोजन और जीवन बनाने की अगर हम कोशिश करेंगे तो हम भी स्वस्थ रहेंगे।

      प्रकृति का पहला सिध्दांत है परिश्रम युक्त जीवन। जिसका पालन पशु पक्षी करते हैं। आसमान में पक्षी कोसों दूर तक उड़ते रहते हैं फिर अपना भोजन प्राप्त करते हैं। इसी प्रकार जानवर भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक मीलों चल कर अपना भोजन प्राप्त करते हैं। प्रकृति भी हमें मेहनत करना सिखाती है। जिस प्रकार पेड़ के पत्ते हमेशा हिलते रहते हैं। नदी का पानी हमेशा बहता रहता है।

      अगर नदी का पानी बहना छोड़ दे तो तालाब बन जायेगा और तालाब में स्वत: ही कीटाणु पैदा होने लगते हैं। और तालाब का  पानी पीने योग्य नहीं होता जबकि नदी का पानी पीने योग्य। मेहनतयुक्त जीवन जीने  वाले का जीवन जीने योग्य होता है। बैठा जीवन जीने वाले के शरीर में अपने आप कीटाणु पैदा हो जाते हैं और बीमारी जीवन को घेर लेती है।

      बीमारी से दूर रहने के लिये हमें प्रकृति का ही सहारा लेना चाहिये। मिट्टी शरीर में से सारे विजातीय तत्व खींच लेती है इसलिये प्राकृतिक चिकित्सालयों में मिट्टी का लेप किया जाता है। हमारे पूर्वज किसान, माली या कुम्हार होते थे। तो उनका मिट्टी से संपर्क बना रहता था और वे स्वस्थ बने रहते थे। इसलिये महीने में एक बार पूरे बदन पर काली मिट्टी का लेप करें और सुंदर दिखें।

      पृथ्वी (धरती) स्वयं एक बहुत बड़ा लौह चुंबक है। जमीन पर सोने से हमें लौह चुंबकीय शक्ति मिलती है। इसलिये कम से कम एक घंटे हमें धरती पर सोना चाहिए। जमीन उबड़-खाबड़ होती है उसी कारण जमीन पर सोने वाले सभी जानवरों के सारे पॉइन्टस दब जाते है। नारियल के पत्तों की चटाई बिछाकर सोने से अपने आप एक्युप्रेशर चिकित्सा हो जाती है।

      पानी पृथ्वी का अमृत है और स्वास्थ्य के लिये सबसे जरूरी तत्व है। पानी के द्वारा शरीर की सफाई होती है। पूरे दिन में 15 से 20 ग्लास पानी पीने से शरीर का कचरा निकल जाता है। भूखे पेट पानी पीना चाहिये और भोजन के दो घंटे बाद पानी पीना टॉनिक के समान है। भोजन करते समय पानी नहीं पीना चाहिये। सुबह खाली पेट पानी पीना अमृत जैसा है। पशुपक्षी पानी में, तालाब में बैठते हैं। पानी में भी ऐसी शक्ति है, जो शरीर के विजातीय तत्वों को खींच लेती है। हमारे पूर्वज नदी तालाबों में नहाते थे, बारिश में भीगते थे तो उनकी पानी से चिकित्सा हो जाती थी। इसलिये माह में एक बार कम से कम आधा घंटा पानी में बैठें और रोगों को दूर भगायें।

      शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है। चार तत्व भोजन, पानी, हवा, अग्नि तो हमें मिल जाती है पर पांचवा तत्व आकाश तब तक नहीं मिलता जब तक हम उपवास नहीं करते। सभी जानवर भी उपवास करते हैं। पशुपक्षी जब भी बीमार  होते हैं खाना छोड़ देते हैं। प्रत्येक धर्म में भी उपवास की परंपरा है। सप्ताह में एक दिन उपवास करने से शरीर को भोजन पचाने में आसानी होती है और शरीर स्वस्थ रहता है।

      पशु पक्षी सूरज की रोशनी में दिनभर रहते हैं इसलिये वे कभी बीमार नहीं पड़ते। मनुष्य चार दीवारों के बीच सूर्य का प्रकाश न पाकर बीमार पड़ता है। इसलिये सुबह की सूरज की रोशनी मनुष्य को अवश्य लेनी चाहिये। छोटे बच्चों को सुबह की धूप दिखानी चाहिये जिससे उनकी हड्डियां और दिमाग मजबूत होता है। बड़ों को भी सूरज की रोशनी में सूर्य नमस्कार करना चाहिये। जानवर वहीं पानी पीता है जिसमें सूर्य की किरणें पड़ीं हों। हमें भी घर का मटका घर के आंगन या सूरज की रोशनी में रखना चाहिये। पानी पीने से शरीर में सात रंगों का बेलेन्स हो जाता है।

      हम स्वच्छ पानी पीते हैं, साफ सफाई से रहते हैं, कई तरह की सावधानी बरतते हैं फिर भी रोगग्रस्त हो जाते हैं परंतु हम जानवरों को देखें तो वे स्वस्थ रहते हैं क्योंकि उनकी रोगप्रतिरोधक क्षमता अत्यंत बलशाली होती है। कारण यह है कि वे नंगे पैर चलते है तो उनके पंजों के पाइंट कंकर, पत्थरों से दबते रहते हैं। एक्युप्रेशर सिध्दातों के अनुसार शरीर के सभी आंतरिक अवयवों के बिंदु या तो पंजों में या पैर के तलवों में स्थित होते  हैं।

      ज्यादातर पशुपक्षी शाकाहारी ही है और वे स्वस्थ रहते हैं। चावल की भूसी, गेहूँ का चोकर, सब्जियों के डंठल, फल, सब्जियों के छिलके इन्हें हम कचरा समझ कर गाय, बकरी को खिला देते हैं। यह चोकर बहुत ही पौष्टिक होता है, पेट साफ करने वाले होते है, पर हम मैदा (चोकर से निकला आटा), पॉलीश किये हुए चावल, रीफाइण्ड तेल, पॉलिश की हुई दालें, अनाज, छिलके उतारी हुई सब्जियां और फल खाते हैं। सभी चीजें छिलके सहित खाने से हम स्वस्थ रहेंगे।

      पशु पक्षी कच्चा ही खाते हैं पकाकर नहीं। कच्चा भोजन जीवन के लिये शक्ति से भरपूर होता है। शायद इसलिये चिकित्सालयों में कच्चा भोजन रोगियों को दिया जाता है। कच्चा सलाद, फल, अंकुरित दालें, अनाज, नारियल, सोयाबीन का दूध, खजूर, गेहूँघास, गोमूत्र आदि। जानवर जीभ के स्वाद के लिये नहीं खाते, मनुष्य जीभ का गुलाम है। दो इंच की जीभ छह फुट के शरीर को बीमार बना देती है। सभी धर्मों में भी अस्वाद भोजन की परंपरा है। कम से कम हफ्ते में एक दिन कच्चा भोजन या बिना मिर्च, मसाला का अस्वाद भोजन जरूर लेना चाहिये।

 

शैक्षणिक त्रऽण

शैक्षणिक त्रऽण

राज्य सभा

 

NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009

       वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री नमो नारायण मीना ने आज एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्य सभा को बताया कि भारतीय बैंक संघ (आईबीए) की शिक्षा त्रऽण योजना के तहत सरकारी क्षेत्र के बैंकों का कार्य निष्पादन धनराशि और साथ ही खातों की संख्या की दृष्टि से शिक्षा त्रऽण में निरन्तर वृध्दि दर्शाता है । आईबीए के आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च, 2009 की स्थिति के अनुसार सरकारी क्षेत्र के बैकों के शिक्षा त्रऽणों के तहत 16,03,385 खातों में कुल बकाया राशि 27,646 करोड़ रुपये है ।

       31 मार्च, 2008 को कुल बकाया त्रऽणों में वृध्दि निरपेक्ष और प्रतिशत की दृष्टि से क्रमश: 7,829 करोड़ रुपये और 39 प्रतिशत थी ।

       इसी तरह, इसी अवधि के दौरान खातों की संख्या में 3,56,515 की वृध्दि हुई जिससे 29 प्रतिशत की वृध्दि दर्ज हुई ।

       इसके अतिरिक्त, पूरे देश में छात्रों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से सरकारी क्षेत्र के बैकों को सलाह दी गयी है कि वे आन-लाइन व्यवस्था शुरू करें, आयुपरिचालन क्षेत्र के आधार पर त्रऽण आवेदन अस्वीकृत न करेंउन्हें अन्य बैंकोंशाखाओं को न भेजें । शिक्षा त्रऽण योजना के तहत सरकारी क्षेत्र के बैंकों के कार्यनिष्पादन की समीक्षा वित्त मंत्री जी की तिमाही बैठकों में बैकों के मुख्य कार्यपालकों के साथ की जाती है ।

 

 

 

बैंको से ऋण की मासिक किस्त की गणना

बैंको से ऋण की मासिक किस्त की गणना

राज्यसभा

NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009

केंद्रीय वित्ता राज्यमंत्री श्री नमो नारायण मीना ने आज राज्यसभा में पूछे गये एक प्रश्न के लिखित उत्तार में बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने ''ऋणदाताओं के लिए उचित व्यवहार संहिता'' पर दिशानिर्देश जारी किये हैं जो बैंकों# वित्ताीय संस्थाओं#गैर-बैंकिंग वित्ताीय कंपनियों (एनबीएफसी) द्वारा अपने-अपने बोर्डों द्वारा विधिवत अपनाए जाने अपक्षित हैं। ये दिशानिर्देश, जिन्हें आवधिक तौर पर संशोधित किया जाता है, अन्य बातों के साथ-साथ, निर्धारित करते हैं कि ऋणकर्ता द्वारा मांगे गए ऋण की राशि पर ध्यान दिये बिना, ऋणों के सभी वर्गों के संबंध मं ऋण आवेदन प्रपत्र व्यापक होने चाहिए। इनमें, संसाधन के लिए देय शुल्क# प्रभार, यदि कोई हों, आवेदन स्वीकार नहीं किये जाने के मामले में प्रतिदेय ऐसे शुल्क की राशि, पूर्व-भुगतान विकल्प और अन्य कोई मामला जो ऋणकर्ता के हित को प्रभावित करता हो, के बारे में जानकारी होनी चाहिए जिससे अन्य बैंकों के साथ एक अर्थपूर्ण तुलना की जा सके और ऋणकर्ता द्वारा संज्ञानपूर्वक निर्णय लिया जा सके। इसके अलावा, बैंको को परामर्श दिया जाता है कि वे ग्राहक को ''मूल्य में सब कुछ'' के बारे में जानकारी दें जिससे ग्राहक वित्ता के अन्य स्रोतों के साथ, प्रभारित दरों की तुलना कर सके।

'' ऋण और अग्रिम-सांविधिक और अन्य नियंत्रण'' के संबंध में आरबीआई के 01 जुलाई, 2009 को दिशानिर्देशों के अनुसार, ऋणकर्ता को, ऋणकर्ता को, लिखित में और प्राधिकृत अधिकारी द्वारा विधिवत् रूप से प्रमाणित, अन्य बातों के साथ-साथ, निबंधन एवं शर्तें और ऋण सुविधाओं को शासित करने वाली अन्य चेतावनियां बतानी चाहिए। ऋण करार की प्रति और साथ में ऋण करार में उल्लिखित सभी संलग्नकों की एक प्रति, निरपवाद रूप से, ऋणों की संस्वीकृति# संवितरण के समय ऋणकर्ताओं को दी जानी चाहिएं।

इसके अतिरिक्त, बैंक# वित्ताीय संस्थाएं# एनबीएफसी संगत कारकों जैसे कि निधियों की लागत, मार्जिन एवं जोखिम प्रीमियम, आदि को ध्यान में रखते हुए एक ब्याज़ दर मॉडल अपनाती है और ऋणों तथा अग्रिमों के लिए प्रभारित किये जाने वाले ब्याज़ की दर निर्धारित करती हैं।

 

क्षेत्रीय भाषाओं में लिखे चैकों का स्वीकार किया जाना

क्षेत्रीय भाषाओं में लिखे चैकों का स्वीकार किया जाना

 

राज्यसभा

 

       NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009

केंद्रीय वित्ता राज्यमंत्री श्री नमो नारायण मीना ने आज राज्यसभा में पूछे गये एक प्रश्न के लिखित उत्तार में बताया कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने 1 जुलाई, 2009 को जारी अपने मास्टर परियन में सभी अनुसूचित बैंकों (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंको को छोड़कर) को सलाह दी है कि सभी चैक फर्ॉम्स हिन्दी तथा अंग्रेजी में ही छापे जाएंगे। हालांकि उपभोक्ता हिन्दी, अंग्रेजी या किसी भी संबंधित क्षेत्रीय भाषा में इन चैकों को भर सकते हैं।

 

 

टेलीविजन पर दिखाई जाने वाली विषय-वस्तुओं का विनियमन

टेलीविजन पर दिखाई जाने वाली विषय-वस्तुओं का विनियमन

 

लोकसभा
NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009

सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री श्री सी.एम.जातुया ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि समय-समय पर इलेक्ट्रानिक मीडिया में हिंसा, अश्लीलता एवं फूहड़ता के दृश्यों के खिलाफ कई संदर्भशिकायतें प्राप्त हुई हैं। लेकिन बढ रही प्रवृत्ति को दर्शाने के संबंध में कोई औपचारिक अध्ययन जानकारी में नहीं आया है।
सरकार ने केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तहत निर्धारित कार्यक्रम एवं विज्ञापन संहिताओं के विशिष्ट उल्लंघन की जांच करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयीय समिति का गठन किया है। समिति स्व-प्रेरणा से या शिकायतें प्राप्त होने पर उल्लंघनों की जांच करती है और तत्पश्चात् सरकार को अपनी सिफारिशें देती हैं जिसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। सरकार ने मौजूदा संहिताओं के प्रावधानों को अधिक विशिष्ट बनाने के लिए केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तहत निर्धारित कार्यक्रम एवं विज्ञापन संहिताओं (विषय-वस्तु संहिता) की समीक्षा करने के लिए एक समिति का भी गठन किया है। समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है।

जिन चैनलों के खिलाफ शिकायत प्राप्त होने के बाद मंत्रालय ने नोटिस जारी किया था उनका विवरण अनुलग्नक के रूप में संलग्न है।

http://pib.nic.in/archieve/others/2009/nov/h200911243239.pdf

 

विज्ञापनों की प्रामाणिकता का तंत्र

विज्ञापनों की प्रामाणिकता का तंत्र

NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009

 

लोकसभा

 

       सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री श्री सी.एम.जातुया ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि ऐसा कोई तंत्र नहीं है जिससे टेलीविजन पर प्रसारित विज्ञापन के दावों की जांच की जा सके। मौजूदा केबल टीवी नेटवर्क (विनयमन) अधिनिमय, 1995 और उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों में ऐसे किसी तंत्र का प्रावधान नहीं है।

 

       उन्होंने बताया कि सभी टीवी चैनलों को केबल नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अंतर्गत निर्धारित विज्ञापन संहिता के प्रावधानों का अनुपालन करना होता है। उक्त नियमों के नियम (7)(4) में प्रावधान है कि विज्ञापित माल एवं सेवाओं में उपभोक्ता सुरक्षा अधिनियम, 1986 में यथा-उल्लिखित कोई खामी या न्यूनता नहीं होगी।

 

चर्चे-चर्खे : किसी को सजा, निदंक नियरे राखिए , किसी को मजा – राकेश अचल

चर्चे-चर्खे : किसी को सजा, निदंक नियरे राखिए , किसी को मजाराकेश अचल

( लेखक ग्‍वालियर चम्‍बल क्षेत्र के वरिष्‍ठ पत्रकार एवं संपादक हैं )

खतरे मे सी एम

       मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खतरे मे है। लगता है शनि की कोई महादशा उन्हे परेशान कर रही है। 10 नवंबर को ग्वालियर में सी एम का उड़न खटोला लेंडिंग के समय वायु सेना की दोजीषों से टकराते-टकराते बचा, वह तो ऐनन मौके पर एटीसी ने ''गो अराउण्ड'' कह कर सबकी जान बचाली। जानकारो का कहना है कि सी एम के घर जब से नोट गिनने की मशीन आई है उसी दिन से कुछ न कुछ अपशकुन हो रहे है। साधना मामी ही अब इसका कोई उपाय कर सकती है। शनि की प्रतिकृति घर में रखने की क्या जरूरत। मशीन का काम हाथो से भी हो सकता है।

 

किसी को सजा, किसी को मजा

       आई.ए.एस. श्रीमती अंजू बघेल को जिस तरह से जमीन घोटाले में कथित रूप से लिप्त होने के आरोप में निलंबित किया गया, उसी तरह के आरोपो से घिरे छोटे भैया को जमीन घोटालों  की जांच का काम भी सौप दिया गया। छोटे भैया में कुछ तो खास है जो वे हर निजाम में ''इमाम'' की तरह पूछे परखे जाते है। दिग्गीराजा भी उन्हे ''नाक के बाल'' की, तरह सम्हाल कर रखते थे और मामा जी भी ऐसा ही कर रहे है। यानि शिव ने जो संपादा रावण को सौपी थी वही विभीषण को भी सौंप दी।

 

फिर नही गए पवन शर्मा

       सरकार किसी की भी हो, चलती आई.एस.एस. अफसरों की ही है। ग्वालियर के नगर निगम आयुक्त डा. पवन शर्मा ने दूसरी बार सरकारी आदेश को संशोधित कर यह बात एक बार फिर साबित कर दी। डा.पवन शर्मा को सरकार ने पहले बुरहानपुर का कलेक्टर पदस्थ किया, लेकिन वे नहीं गए। अबकी बार उन्हे सागर का कलेक्टर बनाया गया, लेकिन वे वहां भी नही गए। उनकी जगह शिवपुरी कलेक्टर को सागर भेजा गया। डा. शर्मा ग्वालियर में ही जमे है। जाहिर है कि पवन शर्मा के पास कोई तो जादुई चिराग का जिन्न है, जो बार-बार उनकी मुराद पूरी कर देता है और बेचारे शिवराज सिंह और उनके मुख्य सचिव राकेश साहनी टापते रह जाते है।

 

ब्रम्हा बनाम मुन्ना

       भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर यानि ''मुन्ना'' को उनके साथी-संगी अब ''ब्रम्हा'' कि तरह पूजने लगे है। पार्टी और सरकार के कई प्रस्तावो पर आखरी मुहर ब्रम्हा जी की ही लगती है। कम से कम मुन्ना के ग्रह नगर में तो यहीं मान्यता हैं स्थानीय निकाय चुनावों के लिए टिकटार्थी अपने-अपने नेता की गणेश परिक्रमा कर रहे है लेकिन उन्हे यही सलाह दी जा रही है कि यदि टिकिट चाहिए तो ''ब्रम्हा'' जी का ध्यान करो। सिध्दियां और मनोकामनाएं वही से पूरी होती है।

 

एम.पी. चाहिए या मेयर

       स्थानीय निकाय चुनाव के लिए जिन नगर निगमों में महापौर का पद महिलाओं के लिए आरक्षित हुआ है, वहां टिकिट की पैरवी करने वालो से पार्टी से पार्टी के नेता, खासकर सत्तारूठ दल के नेता एक ही सवाल करते है कि आपको एम.पी.चाहिए या मेयर। एम.पी. अर्थात मेयर पति। धारणा यह है कि जहां भी महिला महापौर चुनी जाती है वहां ''सत्ता'' महिला महापौरों के पतियों के हाथ में होती है। अभी तक यह जमला पंचायतो में ही प्रचलित था लेकिन अब स्थानीय निकाय चुनाव भी इससे अछूते नहीं रहे।

 

मामी को ऑफर

दूसरी बार राज्यसभा के लिए चुनी गई श्रीमती मायासिंह को पार्टी के एक गुट ने ग्वालियर से महापौर का टिकिट ऑफर किया है ग्वालियर मे महापौर का पद पिछड़े वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हुआ है। दुर्भाग्य से पार्टी के पास कोई सर्वमान्य उम्मीदवार नहीं है, ऐसे में कुछ लोगो को श्रीमती माया सिंह के पिछडे होने की याद आई मायासिंह को पार्टी के लोग सम्मान से मामी जी कहते है। मामी जी को जब यह प्रस्ताव मिला तो उन्होने हाथ खड़े कर दिए। वैसे मामी जी पिछली शताब्दी के नौ वे दशक मे उपमहापौर रह चुकी है।

 

टीसी की खोज

       म.प्र. सरकार को नया टी.सी., यानि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर खोजने में पसीना आ रहा है। प्रदेश मे लगातार चार साल ट्रासंपोर्ट कमिश्नर रहे एन के त्रिपाठी सी.आर.पी.एफ के महानिदेशक बनकर दिल्ली चले गए। उनके स्थान पर आने के एिल पी.एच.क्यू में बैठे तमाम पुलिस अफसरों ने टेण्डर डाले है लेकिन अभी तक लिफाफे नहीं खुल पाए है। इस शून्य काल में टी.सी. कहने को विभाग के सचिव है लेकिन टीसी का रूतबा गालिब कर रहे है डिप्टी टी.सी.। प्रवर्तन शाखा के डिप्टी टीसी इस समय फुलफार्म मे है। आगे नाथ न पीछे पगा। आपकों पता ही होगा कि ट्रासपोर्ट महकमा सरकार की कामधेनु है। इसे दोहने की कला केवल ट्राँसपोर्ट कमिश्नर को आती है।

 

नए सी.पी.आर. की खोज

       काम के बोझ से जमीन में घंसे जा रहे जनसंपर्क आयुक्त मनोज श्रीवास्तव को राहत देने के लिए अब उनके उत्तराधिकारी की गंभीरता से खोज की जा रही है। मनोज श्रीवास्तव ने सत्ता और संगठन की बेहतर सेवाएं कर अपने लिए नया मुकाम लगभग तय कर लिया है। उनके स्थान पर भोपाल के संभाग आयुक्त पुखराज मारू तथा संजय शुक्ला के नामों पर चर्चा हो रही है। मारू के पास हालांकि डिग्रियों का अंबार है लेकिनउनके साथ जुडे विवाद डिग्रियों पर भारी पड़ रहे है। ऐसे में संजय शुक्ला की संभावनाएं ज्यादा उज्जवल और प्रबल है। यह परिवर्तन किसी भी समय हो सकता है। निगम चुनावों का इससे कोई लेना देना नहीं है।

 

निदंक नियरे राखिए

       प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा की सेहत का राज क्या है? खोजा तो पता चला  िकवे सदैव अपने निदंको को अपने नियर (पास) रखते है वह भी आगन मे कुटिया डलवा कर। पूर्व विधायक नरेंद्र निरथरे ने जल संसाधन मंत्री के रूप मे अनूप मिश्रा की थोक में शिकायतें की लेकिन मिश्रा जी से जैसे ही जिरथरे ने अपने भतीजे के लिए काम मांगा, स्वास्थ्यम मंत्री के रूप मे मिश्रा जी ने तत्काल बिरथरे के भतीजे को शिवपुरी मे स्वास्थ्य विभाग की दो इमारते बनाने का ठेका दिला दिया। मंत्री जी की इस दरियादिली की खबर पाकर पार्टी के नरियदिल नेता परेशान है। बेचारे मंत्री जी को घेर ही नही पा रहे।

 

जोशी बनाम जोशी

       जलसंसाधन विभाग में 307 करोड़ रूपए का घोटाला खुला सो अब घोटाले में लिप्त इंजीनियर अपने नेता यानि चीफ इंजीनियर जोशी को कोस रहे है। खबर है कि चीफ इंजीनियर जोशी ने हरसी बांध परियोजना में करोड़ो के टेण्डर लगाकर भुगतान कर दिया लेकिन विभाग के प्रमुख सचिव जोशी को कानी कौड़ी भी नही दी। जोशी ने जोशी से तकादा भी किया लेकिन रिटायर होने के बैठे चीफ इंजीनियर जोशी ने प्रमुख सचिव जोशी को ढेंगा दिखा दिया। इस पर पंडित जी को गुस्सा आया। उन्होने मामला ई.ओ.डब्लू को दे दिया। मुकदमा दर्ज होते ही तमाम इंजीनियर सस्पेंड हो गए अब उनकी तिजोरियां सोने की ईटें और नोटों के बंडल उगल रही है।

 

राकेश अचल

 

सचिव (आईएंडबी) ने फिल्म उद्योग के स्वस्थ और व्यवस्थित विकास के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया

सचिव (आईएंडबी) ने फिल्म उद्योग के स्वस्थ और व्यवस्थित विकास के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया

       भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सचिव श्री रघु मेनन ने फिल्म उद्योग के पणधारकों (स्टॉक होल्डर्स) को आश्वस्त किया कि भारत सरकार फिल्म उद्योग  और मीडिया उद्योग के संपूर्ण, स्वस्थ और व्यवस्थित विकास के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने का पूर्ण प्रयास करेगी । श्री मेनन गोवा में 40वें अन्तरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव के साथ-साथ आज भारतीय उद्योग संघ के सहयोग से पणजी में आयोजित इंडिया-दि बिग पिक्चर सम्मेलन को मुख्यरूप से सम्बोधित कर रहे थे ।

       सचिव श्री रघु मेनन ने बताया कि घरेलू फिल्म व्यवसाय और आईपीआर विषय पर  सम्मेलन में पूरे दिन चली बातचीत के मुद्दे भविष्य में दीर्घावधि तक अच्छे  फल देने वाले होंगे। उन्होंने कहा कि मीडिया क्षेत्र 13 प्रतिशत वार्षिक की दर से विकास कर रहा है। 13 प्रतिशत की वार्षिक दर चक्रवृध्दि विकास के लिए काफी है, लेकिन पर्याप्त नहीं  है । उन्होंने कहा कि उपयुक्त फलदायी उपायों साधनों और विषय सुधार तक पहुंचने के लिए उद्योग द्वारा झेली जा रही समस्याओं पर सच्ची अन्तरदृष्टि की आवश्यकता है । उन्होंने सूचित किया कि मनोरंजन उद्योग के लिए नकल (पायरेसी) सबसे बड़ा खतरा है और सरकार अपनी ओर से कानून लागू करने के लिए कदम उठा रही है ।

       श्री रघु मेनन से सूचित किया कि दिल्ली में 5 दिसम्बर, 2009 को होने वाले निर्धारित सम्मेलन में पायरेसी के मुद्दे पर भी विस्तार से बातचीत होगी। सचिव महोदय ने कहा कि सरकार तो दंडात्मक कार्रवाई करेगी ही लेकिन मनोरंजन उद्योग को भी इसे रोकने के लिए कदम उठाने चाहिएं और लोगों को ऐसे उत्पादों का बहिष्कार करने के लिए जागरूक करना चाहिए।

       भारतीय फिल्म और टेलीविजन निर्माता संघ लिमिटेड के अध्यक्ष श्री मनमोहन शेट्टी ने अपने विशेष सम्बोधन में कहा कि मीडिया उद्यमियों  को औसत भारतीय परिवार के लिए सिनेमा देखने हेतु वहन करने योग्य खर्चे पर नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए    मल्टीप्लेक्स टिकटों की लागत और कलाकारों के अनुबंध की राशि पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

       गोवा के मुख्यमंत्री श्री दिगम्बर वी. कामत ने अपने उद्धाटन भाषण में अपनी ओर से फिल्म उद्योग को गोवा सरकार के पूर्ण सहयोग के लिए आश्वस्त किया।

 

ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया बैठक की सह अध्‍यक्षता करेंगे

ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया बैठक की सह अध्‍यक्षता करेंगे

NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009

              भारत-अजरबैजान व्यापारिक, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिक सहयोग अंतर-सरकारी आयोग की 26 नवम्बर को पहली बैठक का कार्यक्रम है । भारतीय पक्ष की ओर से केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया सहअध्यक्ष होंगे, जबकि अजरबैजान पक्ष की ओर से वहां के पारिस्थितिकी एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री हुसैन्गुलु बाघिरोव इसके सह अध्यक्ष होंगे ।

       बैठक के दौरान परस्पर व्यापार के अवसर, औद्योगिक, आर्थिक, वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी सहयोग, परिवहन, ऊर्जा, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, पर्यटन, पर्यावरण, सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में परस्पर सहयोग पर चर्चा होने की संभावना है ।

       वित्तीय वर्ष 2008-09 के दौरान दोनों देशों के बीच 22 करोड़ 22 लाख 70 हजार डालर का व्यापार हुआ था । भारत से दवाइयां, मशीनरी एवं उपकरण , आभूषण कपास, ऊन आदि निर्यात हुआ और भारत ने कच्चे पेट्रोल एवं उसके उत्पाद, जैविक एवं अजैविक रसायन आदि आयात किया । 

 

लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट तथा एटीआर संसद के पटल पर रखी गई

लिब्राहन आयोग की रिपोर्ट तथा एटीआर संसद के पटल पर रखी गई

 

NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009

गृहमंत्री श्री पी. चिदम्बरम ने लिब्राहन अयोध्या आयोग की रिपोर्ट, कार्रवाई रिपोर्ट के साथ आज संसद के पटल पर रखी। इस रिपोर्ट के चारों खंडों के साथ कार्रवाई रिपोर्ट भी गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी कर दी गई है। यह रिपोर्ट अब http://mha.nic.in/uniquepage.asp?ld Pk=571 पर उपलब्ध है।

या

लिब्राहन अयोध्या आयोग जांच रिपोर्ट को मंत्रालय की वेबसाइट पर ढूंढे।

http://www.mha.nic.in 

 

पुलिस द्वारा गिरफ्तारी पर सीआरपीसी में संशोधन

पुलिस द्वारा गिरफ्तारी पर सीआरपीसी में संशोधन

NEW DELHI 24th NOVEMBER 2009

लोक सभा

 

       गृह राज्य मंत्री श्री मुल्लापल्ली रामचन्द्रन ने आज एक प्रश्न के लिखित उत्तर में लोक सभा को बताया कि राष्ट्रीय पुलिस आयोग ने अपनी तीसरी रिपोर्ट में, अन्य बातों के साथ-साथ यह उल्लेख किया है कि पुलिस द्वारा की गयी गिरपऊतारियों में से ज्यादातर गिरपऊतारियां वस्तुत: अपराध की रोकथाम की दृष्टि से न्यायोचित नहीं हैं । उन्होंने बताया कि इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए वारंट के बगैर गिरपऊतार करने की पुलिस की शक्ति से संबंधित दण्ड प्रक्रिया संहित (क्ध्द. घ्.क्.) की धारा 41 को हाल ही में दण्ड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) विधेयक, 2008 के माध्यम से संशोधित किया गया है । संशोधित धारा  41 (1) के खण्ड (ख) में यह प्रावधान है कि कोई व्यक्ति, जिसने कोई ऐसा संज्ञेय अपरोध किया है, जो सात वर्ष से कम अवधि के कारावास से दण्डनीय है, को युक्तियुक्त शिकायत अथवा विश्वसनीय जानकारी अथवा युक्तियुक्त संदेह के आधार पर गिरपऊतार किया जा सकता है और पुलिस अधिकारी को ऐसी गिरपऊतारी संबंधी कारणों को रिकार्ड करना होगा । उक्त अधिनियम के प्रावधानों को अभी लागू किया जाना है । उन्होंने बताया कि इसी बीच, भारत के विधि आयोग ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की संशोधित धारा 41(ख) में पुन: यह संशोधन करने की सिफारिश की है कि पुलिस अधिकारी धारा 41 के तहत गिरपऊतारी करने के लिए ही नहीं बल्कि धारा 41 के तहत गिरपऊतारी करने के कारणों को भी रिकार्ड करने के लिए बाध्य हो । तदनुसार, अन्य बातों के साथ-साथ संसद में एक ऐसा विधेयक पेश करने का प्रस्ताव है जिसमें विधि आयोग द्वारा की गयी सिफारिश की तर्ज पर दण्ड प्रक्रिया संहिता की संशोधित धारा 41 (ख) में संशोधन का प्रस्ताव निहित हो । 

 

चर्चे-चर्खे : ब्रम्हा बनाम मुन्ना - राकेश अचल

चर्चे-चर्खे : ब्रम्हा बनाम मुन्ना  - राकेश अचल

लेखक ग्‍वालियर चम्‍बल क्षेत्र के वरिष्‍ठ पत्रकार एवं संपादक हैं

खतरे मे सी एम

      मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खतरे मे है। लगता है शनि की कोई महादशा उन्हे परेशान कर रही है। 10 नवंबर को ग्वालियर में सी एम का उड़न खटोला लेंडिंग के समय वायु सेना की दोजीषों से टकराते-टकराते बचा, वह तो ऐनन मौके पर एटीसी ने ''गो अराउण्ड'' कह कर सबकी जान बचाली। जानकारो का कहना है कि सी एम के घर जब से नोट गिनने की मशीन आई है उसी दिन से कुछ न कुछ अपशकुन हो रहे है। साधना मामी ही अब इसका कोई उपाय कर सकती है। शनि की प्रतिकृति घर में रखने की क्या जरूरत। मशीन का काम हाथो से भी हो सकता है।

 

किसी को सजा, किसी को मजा

      आई.ए.एस. श्रीमती अंजू बघेल को जिस तरह से जमीन घोटाले में कथित रूप से लिप्त होने के आरोप में निलंबित किया गया, उसी तरह के आरोपो से घिरे छोटे भैया को जमीन घोटालों  की जांच का काम भी सौप दिया गया। छोटे भैया में कुछ तो खास है जो वे हर निजाम में ''इमाम'' की तरह पूछे परखे जाते है। दिग्गीराजा भी उन्हे ''नाक के बाल'' की, तरह सम्हाल कर रखते थे और मामा जी भी ऐसा ही कर रहे है। यानि शिव ने जो संपादा रावण को सौपी थी वही विभीषण को भी सौंप दी।

 

फिर नही गए पवन शर्मा

      सरकार किसी की भी हो, चलती आई.एस.एस. अफसरों की ही है। ग्वालियर के नगर निगम आयुक्त डा. पवन शर्मा ने दूसरी बार सरकारी आदेश को संशोधित कर यह बात एक बार फिर साबित कर दी। डा.पवन शर्मा को सरकार ने पहले बुरहानपुर का कलेक्टर पदस्थ किया, लेकिन वे नहीं गए। अबकी बार उन्हे सागर का कलेक्टर बनाया गया, लेकिन वे वहां भी नही गए। उनकी जगह शिवपुरी कलेक्टर को सागर भेजा गया। डा. शर्मा ग्वालियर में ही जमे है। जाहिर है कि पवन शर्मा के पास कोई तो जादुई चिराग का जिन्न है, जो बार-बार उनकी मुराद पूरी कर देता है और बेचारे शिवराज सिंह और उनके मुख्य सचिव राकेश साहनी टापते रह जाते है।

 

ब्रम्हा बनाम मुन्ना

      भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नरेंद्रसिंह तोमर यानि ''मुन्ना'' को उनके साथी-संगी अब ''ब्रम्हा'' कि तरह पूजने लगे है। पार्टी और सरकार के कई प्रस्तावो पर आखरी मुहर ब्रम्हा जी की ही लगती है। कम से कम मुन्ना के ग्रह नगर में तो यहीं मान्यता हैं स्थानीय निकाय चुनावों के लिए टिकटार्थी अपने-अपने नेता की गणेश परिक्रमा कर रहे है लेकिन उन्हे यही सलाह दी जा रही है कि यदि टिकिट चाहिए तो ''ब्रम्हा'' जी का ध्यान करो। सिध्दियां और मनोकामनाएं वही से पूरी होती है।

 

एम.पी. चाहिए या मेयर

      स्थानीय निकाय चुनाव के लिए जिन नगर निगमों में महापौर का पद महिलाओं के लिए आरक्षित हुआ है, वहां टिकिट की पैरवी करने वालो से पार्टी से पार्टी के नेता, खासकर सत्तारूठ दल के नेता एक ही सवाल करते है कि आपको एम.पी.चाहिए या मेयर। एम.पी. अर्थात मेयर पति। धारणा यह है कि जहां भी महिला महापौर चुनी जाती है वहां ''सत्ता'' महिला महापौरों के पतियों के हाथ में होती है। अभी तक यह जमला पंचायतो में ही प्रचलित था लेकिन अब स्थानीय निकाय चुनाव भी इससे अछूते नहीं रहे।

 

मामी को ऑफर

दूसरी बार राज्यसभा के लिए चुनी गई श्रीमती मायासिंह को पार्टी के एक गुट ने ग्वालियर से महापौर का टिकिट ऑफर किया है ग्वालियर मे महापौर का पद पिछड़े वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हुआ है। दुर्भाग्य से पार्टी के पास कोई सर्वमान्य उम्मीदवार नहीं है, ऐसे में कुछ लोगो को श्रीमती माया सिंह के पिछडे होने की याद आई मायासिंह को पार्टी के लोग सम्मान से मामी जी कहते है। मामी जी को जब यह प्रस्ताव मिला तो उन्होने हाथ खड़े कर दिए। वैसे मामी जी पिछली शताब्दी के नौ वे दशक मे उपमहापौर रह चुकी है।

 

टीसी की खोज

      म.प्र. सरकार को नया टी.सी., यानि ट्रांसपोर्ट कमिश्नर खोजने में पसीना आ रहा है। प्रदेश मे लगातार चार साल ट्रासंपोर्ट कमिश्नर रहे एन के त्रिपाठी सी.आर.पी.एफ के महानिदेशक बनकर दिल्ली चले गए। उनके स्थान पर आने के एिल पी.एच.क्यू में बैठे तमाम पुलिस अफसरों ने टेण्डर डाले है लेकिन अभी तक लिफाफे नहीं खुल पाए है। इस शून्य काल में टी.सी. कहने को विभाग के सचिव है लेकिन टीसी का रूतबा गालिब कर रहे है डिप्टी टी.सी.। प्रवर्तन शाखा के डिप्टी टीसी इस समय फुलफार्म मे है। आगे नाथ न पीछे पगा। आपकों पता ही होगा कि ट्रासपोर्ट महकमा सरकार की कामधेनु है। इसे दोहने की कला केवल ट्राँसपोर्ट कमिश्नर को आती है।

 

नए सी.पी.आर. की खोज

      काम के बोझ से जमीन में घंसे जा रहे जनसंपर्क आयुक्त मनोज श्रीवास्तव को राहत देने के लिए अब उनके उत्तराधिकारी की गंभीरता से खोज की जा रही है। मनोज श्रीवास्तव ने सत्ता और संगठन की बेहतर सेवाएं कर अपने लिए नया मुकाम लगभग तय कर लिया है। उनके स्थान पर भोपाल के संभाग आयुक्त पुखराज मारू तथा संजय शुक्ला के नामों पर चर्चा हो रही है। मारू के पास हालांकि डिग्रियों का अंबार है लेकिनउनके साथ जुडे विवाद डिग्रियों पर भारी पड़ रहे है। ऐसे में संजय शुक्ला की संभावनाएं ज्यादा उज्जवल और प्रबल है। यह परिवर्तन किसी भी समय हो सकता है। निगम चुनावों का इससे कोई लेना देना नहीं है।

 

निदंक नियरे राखिए

      प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अनूप मिश्रा की सेहत का राज क्या है? खोजा तो पता चला  िकवे सदैव अपने निदंको को अपने नियर (पास) रखते है वह भी आगन मे कुटिया डलवा कर। पूर्व विधायक नरेंद्र निरथरे ने जल संसाधन मंत्री के रूप मे अनूप मिश्रा की थोक में शिकायतें की लेकिन मिश्रा जी से जैसे ही जिरथरे ने अपने भतीजे के लिए काम मांगा, स्वास्थ्यम मंत्री के रूप मे मिश्रा जी ने तत्काल बिरथरे के भतीजे को शिवपुरी मे स्वास्थ्य विभाग की दो इमारते बनाने का ठेका दिला दिया। मंत्री जी की इस दरियादिली की खबर पाकर पार्टी के नरियदिल नेता परेशान है। बेचारे मंत्री जी को घेर ही नही पा रहे।

 

जोशी बनाम जोशी

      जलसंसाधन विभाग में 307 करोड़ रूपए का घोटाला खुला सो अब घोटाले में लिप्त इंजीनियर अपने नेता यानि चीफ इंजीनियर जोशी को कोस रहे है। खबर है कि चीफ इंजीनियर जोशी ने हरसी बांध परियोजना में करोड़ो के टेण्डर लगाकर भुगतान कर दिया लेकिन विभाग के प्रमुख सचिव जोशी को कानी कौड़ी भी नही दी। जोशी ने जोशी से तकादा भी किया लेकिन रिटायर होने के बैठे चीफ इंजीनियर जोशी ने प्रमुख सचिव जोशी को ढेंगा दिखा दिया। इस पर पंडित जी को गुस्सा आया। उन्होने मामला ई.ओ.डब्लू को दे दिया। मुकदमा दर्ज होते ही तमाम इंजीनियर सस्पेंड हो गए अब उनकी तिजोरियां सोने की ईटें और नोटों के बंडल उगल रही है।

 

राकेश अचल

 

ग्राम गाता के विकलांग सतेन्द्र ने लिखी गौरव गाथा

ग्राम गाता के विकलांग सतेन्द्र ने लिखी गौरव गाथा

नेशनल पेरा ओलंपिक स्वीमिंग वाटर पोलों चैम्पियनशिप में जीता कांस्य पदक

भिण्ड 23 नवम्बर 2009

      तहसील मेहगांव के ग्राम गाता के दोनो पैरों से विकलांग सतेन्द्र पुत्र ग्याराम जाटव 22 वर्ष ने भिण्ड जिले का नाम न सिर्फ प्रदेश में वरन राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। उन्होंने मध्यप्रदेश की ओर से कलकत्ता में 9 से 12 अक्टूबर तक सम्पन्न नेशनल पेरा ओलंपिक स्वीमिंग वाटर पोलों चैम्पियनशिप की 50मीटर फ्री स्टाइल तैराकी की एस-2श्रेणी में कांस्य पदक हासिल किया।  ग्रामीण परिवेश के निर्धन परिवार में पले 22 वर्षीय सतेन्द्र वर्तमान में ग्वालियर स्थित एसएलपी कॉलेज मुरार में वायोलॉजी विषय से बीएससी द्वितीय वर्ष में अध्ययन कर रहे है। उन्होंने बताया कि प्रदेश से उक्त प्रतियोगिता में 22 विकलांग खिलाडियों ने भाग लिया। तैराकी की प्रेरणा  कहां से मिली के संबंध में उन्होंने बताया कि वे ग्राम की वैसली नदी में ग्रामीण बच्चों के साथ तैराना सीखे। तैराकी के गुणों को सीखने की ललक हेतु ग्वालियर के फिजीकल कॉलेज में शरदऋतु के उपरांत विशेषज्ञ गुरूजनों के मार्गदर्शन में अभ्यास कर स्वर्ण पदक हासिल करने के लक्ष्य के तहत अभ्यास करेगें।

 

भिण्ड जिले में 8060 वार्डो के आरक्षण की कार्यवाही पूर्ण

भिण्ड जिले में 8060 वार्डो के आरक्षण की कार्यवाही पूर्ण

4033 वार्ड महिलाओं के लिये आरक्षित

भिण्ड 23 नवम्बर 2009

      म.प्र. पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 तथा पठित पंचायत निर्वाचन नियम 1995 के नियम 4 के तहत कलेक्टर भिण्ड सुहेल अली द्वारा गत दिनों ग्राम पंचायतों के पंच पदो के आरक्षण की कार्यवाही सम्पन्न की गई। जिसके तहत भिण्ड जिले में 8060 वार्डो के आरक्षण की कार्यवाही हुई जिसमें 4033 वार्ड महिलाओं के लिये आरक्षित किये गये। जनपद पंचायत रौन में 734 लहार में 1213, गोहद में 1558, अटेर में 1565, मेहगांव में 1848 तथा भिण्ड में 1142 वार्डो के आरक्षण की कार्यवाही हुई।

जनपद पंचायत रोन में महिला आरक्षण की स्थिति

जनपद पंचायत रौन में अनुसूचित जाति के पंच के लिये 170 अन्य पिछडा वर्ग के पंच के लिये 177 तथा अनारक्षित पंच के लिये 387 सहित 734 वार्ड आरक्षित हुए। इनमें से अनुसूचित जाति की महिलाओं हेतु 94, अन्य पिछडा वर्ग की महिलाओं हेतु 102 तथा अनारक्षित महिलाओं के लिये 166 वार्ड आरक्षित हुये।

जनपद पंचायत लहार में महिला आरक्षण की स्थिति

जनपद पंचायत लहार में अनुसूचित जाति के पंच के लिये 306 अन्य पिछडा वर्ग के पंच के लिये 302 तथा अनारक्षित पंच के लिये 252 सहित 601 वार्ड आरक्षित हुए। इनमें से अनुसूचित जाति की महिलाओं हेतु 170, अन्य पिछडा वर्ग की महिलाओं हेतु 179 तथा अनारक्षित महिलाओं के लिये 252 वार्ड आरक्षित हुये।

जनपद पंचायत गोहद में महिला आरक्षण की स्थिति

जनपद पंचायत गोहद में अनुसूचित जाति के पंच के लिये 431अनुसूचित जन जाति के लिये 04 अन्य पिछडा वर्ग के पंच के लिये 386 तथा अनारक्षित पंच के लिये 737 सहित 1558 वार्ड आरक्षित हुए। इनमें से अनुसूचित जाति की महिलाओं हेतु 223, अनुसूचित जन जाति महिलाओं के लिए 02,अन्य पिछडा वर्ग की महिलाओं हेतु 213 तथा अनारक्षित महिलाओं के लिये 341 वार्ड आरक्षित हुये।

जनपद पंचायत अटेर में महिला आरक्षण की स्थिति

जनपद पंचायत अटेर में अनुसूचित जाति के पंच के लिये 255 अन्य पिछडा वर्ग के पंच के लिये 389 तथा अनारक्षित पंच के लिये 921 सहित 1565 वार्ड आरक्षित हुए। इनमें से अनुसूचित जाति की महिलाओं हेतु 129, अन्य पिछडा वर्ग की महिलाओं हेतु 230 तथा अनारक्षित महिलाओं के लिये 418 वार्ड आरक्षित हुये।

जनपद पंचायत मेहगांव में महिला आरक्षण की स्थिति

जनपद पंचायत मेहगांव में अनुसूचित जाति के पंच के लिये 367अन्य पिछडा वर्ग के पंच के लिये 461 तथा अनारक्षित पंच के लिये 1018 सहित 1848 वार्ड आरक्षित हुए। इनमें से अनुसूचित जाति की महिलाओं हेतु 230, अन्य पिछडा वर्ग की महिलाओं हेतु 267 तथा अनारक्षित महिलाओं के लिये 467 वार्ड आरक्षित हुये।

जनपद पंचायत भिण्ड में महिला आरक्षण की स्थिति

जनपद पंचायत भिण्ड  में अनुसूचित जाति के पंच के लिये 247 अन्य पिछडा वर्ग के पंच के लिये 280 तथा अनारक्षित पंच के लिये 615 सहित 1142 वार्ड आरक्षित हुए। इनमें से अनुसूचित जाति की महिलाओं हेतु 142, अन्य पिछडा वर्ग की महिलाओं हेतु 165 तथा अनारक्षित महिलाओं के लिये 270 वार्ड आरक्षित हुये।

 

निकाय चुनाव में होगी भाजपा कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर

निकाय चुनाव में  होगी भाजपा कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर- दैनिक मध्यराज्य मुरैना

भाजपा को बिजली का करंट तो कांग्रेस को मंहगाई का खतरा

राजेश  चिंतक  (लेखक चम्‍बलघाटी के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं )

मुरैना...मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव की घोषणा होते ही राजनेतिक सरगर्मिया तेज होगई है प्रदेश  में  सत्तासीन भारतीय जनता पार्टी और केन्द्र में  सत्तारूढ कांग्रेस के बीच ही इस वार भी सीधा मुकावला होने की संभावना है। विधान सभा चुनाव में मात खाने के बाद कांग्रेस ने लोक सभा में अपने प्रदर्शन को सुधारा मगर अब नगरीय निकायचुनाव में क्या वह लोक सभा के प्रदर्शन को दोहरा पायेगी या भाजपा  एक बर्ष पूर्व हुए विधान सभा चुनाव में पार्टी को मिले अपार जनसमर्थन को बापिस अपने पक्ष में लाने में कामयाव होगी ? दोनों ही दलों के लिये नगरीय निकाय चुनाव में कठिन परीक्षा है। एक ओर प्रदेश की सत्ता पर काविज भाजपा के लिये प्रदेश में बिजली की आपूर्ति सुचारू रूप से न होना नगरीय निकाय के चुनावों में प्रतिकूल स्थिति बना सकती है तो दूसरी ओर केन्द्र की सत्ता पर काविज कांग्रेस के लिये दिनो दिन बढ रही मंहगाई का खतरा भी पैदा हो सकता है। भाजपा बिजली की आपूर्ति पर नियंत्रण नही कर पा रही है और कांग्रेस मंहगाई को नियंत्रित न कर पाने की असमर्थता जता रही है। आम मतदाता बिजली  एवं मंहगाई दोनों से ही बुरी तरह पीडित है ऐसी स्थिति में वह भाजपा या कांग्रेस दोनों में से किसे चुने  दोराहे पर खडाहुआ है। यद्धपि स्थानीय निकाय के चुनाव का संबन्ध बिजली एवं मंहगाई जैसे संबेदनशील मुद्दों को अधिक प्रभावित इसलिये नही करेगा क्यों  कि इन मुद्दों का हल स्थानीय निकाय के सीमा क्षेत्र में नही आता फिर भी किसी सीमा तक ये मुद्दे स्थानीय निकाय के चुनाव में दोनों ही राजनैतिक दलों के लिये सरदर्द बन सकते है।

बहरहाल प्रदेश में  अभी तो दोनो राजनैतिक दल प्रत्याशियों की चयन प्रक्रिया में ही उलझे हुए है जिससे दिनांक 25 तक सुलझने की संभावना है चयन प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद ही इन दलों का चुनाव प्रभावित करने वाले मुद्दो की ओर जावेगा तब ये तय करेगे कि चुनाव जीतने के लिये ऐसी कौन सी लोक लुभावन एवं मतदाता को रिझााने की रणनीति बनाई जाये जिससे स्थानीय निकाय के चुनावों में विजयश्री हासिल की जा सके।

कांग्रेस एवं भाजपा से प्रथक अन्य राजनेतिक दल बसपा,सपा,भाजशपा,राष्ट्रीय सवर्ण समाजपार्टी ,लोकदल अथवा बामदलों का अस्तित्व लोक सभा की तरह स्थानीय निकायचुनावों में भी लुप्त होता दिखाई पडता है। क्यो कि केन्द्र या राज स्तर पर इन दलों की सरकारें न होना तथा राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक स्थिति का अधिक सुदृड न होना इन दलों के अस्तित्व मिटाने में सहायिक सिद्ध हो सकता है। ऐसा इसलिये परलक्षित होता है क्यो कि इन दलों में प्रत्याशियों के चयन की कोई ल चल दिखाई नही देती है। इन दलों से टिकिट माांगने वालों की संख्या नगण्य है। टिकिट के लिये टिकिट चाहने वाले प्रत्याशियों का अभाव है और आपसी कोई प्रतिस्पर्धा भी दिखाई नही देती है। सभी दलों के दल प्रमुख टिकिट मांगने वालों का इंतजार कर रहे है। किन्तु आम तोर पर इन दलों से टिकिट चाहने वाले सामने नही आ रहे है।

 

नगरीय निकाय निर्वाचन 2009 : शिकायतों के निराकरण के लिये प्रभारी अधिकारी

नगरीय निकाय निर्वाचन 2009 : शिकायतों के निराकरण के लिये प्रभारी अधिकारी

ग्वालियर 22 नवम्बर 09। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी ने नगरीय निकायों के आम निर्वाचन 2009 के दौरान प्राप्त शिकायतों के निराकरण के लिये जिला स्तर पर जनसमाधान केन्द्र ग्वालियर के प्रभारी अधिकारी श्री एस के. सक्सेना को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया है।

      उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री शरद श्रोत्रिय ने बताया कि नगर पालिक निगम ग्वालियर, नगर पालिका परिषद डबरा एवं नगर पंचायत बिलौआ, आंतरी, पिछोर, भितरवार के क्षेत्रों की शिकायतों की जांच के लिये भी अधिकारियों को नियुक्त किया गया है।

      नगर पालिका निगम ग्वालियर के वार्ड क्रमांक 1 से 10 तक के लिये वन विभाग ग्वालियर के सहायक वन संरक्षक श्री एन एस. यादव, वार्ड क्रमांक 11 से 20 तक के लिये महिला एवं बाल विकास अधिकारी ग्वालियर श्रीमती सीमा शर्मा, वार्ड क्रमांक 21 से 30 तक वन मंडल ग्वालियर के अनुविभागीय अधिकारी श्री बी के. त्रिपाठी, वार्ड क्रमांक 31 से 40 तक के लिये जिला शिक्षा केन्द्र ग्वालियर के जिला परियोजना समन्वयक श्री सुभाष शर्मा, वार्ड क्रमांक 41 से 50 तक के लिये सहकारी समितियां ग्वालियर के उप पंजीयक श्री आर के. बाजपेयी और वार्ड क्रमांक 51 से 60 तक के लिये वन विभाग ग्वालियर के अनुविभागीय अधिकारी श्री व्ही के. सक्सेना को नियुक्त किया है।

      नगर पालिका परिषद डबरा के सम्पूर्ण वार्डों के लिये हरसी हाई लेबल संभाग-1 डबरा के कार्यपालन यंत्री श्री सी एन. मिश्रा को नियुक्त किया है। इसी प्रकार नगर पंचायत बिलौआ एवं पिछोर के संपूर्ण वार्डों के लिये जनपद पंचायत डबरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री आर के. गोस्वामी, नगर पंचायत आंतरी के संपूर्ण वार्डों के लिये कृषक प्रशिक्षण केन्द्र आंतरी के प्राचार्य श्री जे एस. यादव और नगर पंचायत भितरवार के संपूर्ण वार्डों के लिये वन मंडल भितरवार के अनुविभागीय अधिकारी श्री जी पी. तिवारी को नियुक्त किया गया है।

 

लेखा प्रशिक्षण सत्र दिसम्बर 09 से फरवरी 10 तक : आवेदन की अंतिम तिथि 23 नवम्बर

लेखा प्रशिक्षण सत्र दिसम्बर 09 से फरवरी 10 तक : आवेदन की अंतिम तिथि 23 नवम्बर 

ग्वालियर 22 नवम्बर 09। लेखा प्रशिक्षण का आगामी सत्र दिसम्बर 09 से फरवरी 10 तक आयोजित किया जा रहा है। जिसकी शुरूआत एक दिसम्बर से होगी।

       लेखा प्रशिक्षण शाला ग्वालियर के प्राचार्य ने बताया कि इस सत्र के लिये प्रिंटेड आवेदन पत्र की प्रतियां ग्वालियर एवं चंबल संभाग में स्थापित विभाग प्रमुख एवं कार्यालय प्रमुखों को भेज दी गई हैं। लेखा प्रशिक्षण में प्रवेश के लिये आवेदन पत्र प्राप्त करने की अंतिम तिथि 23 नवम्बर है।

       प्रशिक्षण में प्रवेश के लिये एक वर्ष की नियमित सेवा, हायरसेकेण्डरी / मेट्रिक बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण, हिन्दी मुद्रलेखन परीक्षा, अनुसूचित जाति-जनजाति के कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र की छाया प्रति कार्यालय प्रमुख द्वारा अभिप्रमाणित और लिपिकीय सेवा होना अनिवार्यता है।

 

नगरीय निकाय आम निर्वाचन 2009 : बिना अनुमति के बैनर होर्डिग लगाने पर प्रतिबंध

नगरीय निकाय आम निर्वाचन 2009 : बिना अनुमति के बैनर होर्डिग लगाने पर प्रतिबंध

भिण्ड 22 नवम्बर 2009

      म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा लागू आदर्श आचार सहिता के प्रावधानों के तहत नगरीय निर्वाचन 2009 के दृष्टिगत सभी वैद्य एवं अनुमति प्राप्त स्थानो पर किसी भी प्रकार के चुनाव से संबंधित अथवा राजनीतिक विज्ञापनों के प्रदर्शनों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। नगरीय निकायों की बिना पूर्वानुमति अनापत्ति के कोई राजनीतिक विज्ञापन बैनर, पोस्टर, होडिंग नही लगाया जा सकेगा आदेश का उल्लघंन करने पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171 ज एवं 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

      नगरीय निकाय निर्वाचन के स्वतंत्र निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण सम्पन्न कराने हेतु जारी आदर्श आचार संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नगरीय निकायों की सीमा क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अनाधिकृत कटाउट, बैनर, पोस्टर, प्लैक्स झंडिया एवं अन्य प्रचार सामग्रियां लगाए जाना पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया गया है। निर्वाचन अवधि में नगरीय निकार्यो के द्वारा किसी भी नये स्थान पर होर्डिग एवं विज्ञापन की अनुमति प्रदाय नही की जाएगी।

       निगम के क्षेत्राधिकारी के समस्त वैद्य विज्ञापन स्थानों पर राजनीतिक विज्ञापन, चुनाव संबधी विज्ञापन, प्रदर्शित करने के लिये व्यक्ति संस्थाओं उम्मीदवारों दलों द्वारा सर्व प्रथम निकायों को निर्धारित प्रारूप में संबंधित नगरीय निकाय के मुख्य नगरपालिका अधिकारी को आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा आवेदन पत्र के साथ प्रचार विज्ञापन बोर्ड पर लिखी जाने वाली भाषा मेटर भी बताना होगा, जिसके आधार पर निगम द्वारा शर्तो के अधीन अनुमति, अनापत्ति पत्र जारी किया जाएगा  विज्ञापन एजेन्सी अथ्यर्थी राजनीतिक दलों से उक्तानुसार संबंधित मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा निर्धारित दर से ही राशि बसूल कर सकेगें। नगर पालिका तथा नगर पंचायत के द्वारा भी निर्धारित नीति के अनुरूप ही राजनीतिक दलों उम्मीदवारों को विज्ञापन हेतु शुल्क अनुमतियां दी जा सकेगी। निर्वाचन लडने वाले प्रत्याशी निजी भवनों पर भी भवन स्वामी की लिखित सहमति एवं संबंधित नगरीय निकाय की अनापत्ति प्राप्त करने के उपरांत झण्डे, पोस्टर, बैनर वाल राइटिंग व अस्थाई प्लेक्सबोर्ड भवन स्वामी की दीवार पर लगा सकते है।

      झण्डे बैनर पोस्टर प्लेक्स बोर्ड पर ऐसा कुछ भी नही लिखा जाए कि जिससे कि विभि   समुदायों में असंतोष उत्पन्न होकर लोक न्यूसेंस की संभावना उत्पन्न न हो विज्ञापनों पर आने वाला व्यय अध्यक्ष पद के संबंधित अथ्यर्थी को अपने निर्वाचन व्यय लेखा में सम्मिलित करना होगा।

 

म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नपा कर्मचारियों के लिये आचार संहिता लागू

म.प्र. राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नपा कर्मचारियों के लिये आचार संहिता लागू

भिण्ड 22 नवम्बर 2009

      कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी भिण्ड सुहेल अली ने बताया कि मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा नगरीय निकाय आम निर्वाचन को निष्पक्ष रूप से सम्पन्न कराने के लिये नगर पालिका के पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिये आदर्श आचार संहिता लागू की गई है। आपने नपा कर्मचारियों को लागू आचार संहिता का कडाई से पालन करने पर जोर दिया है। लागू की गई आदश आचार सहिता के तहत निर्वाचन की घोषणा से निर्वाचन की समाप्ति तक नगर पालिका के अधि कोई नियुक्ति या स्थानांतरण नही हो सकेगें।

      नगर पालिका के कर्मचारियों को चुनाव के दौरान अपना कार्य पूर्ण निष्पक्षता से करना चाहिए और ऐसा कोई आचरण तथा व्यवहार नही करना चाहिए जिससे यह आभास हो कि वे किसी दल या उम्मीदवार की मदद कर रहे है। नगर पालिका क्षेत्र में किसी भी भवन का निर्माण या मौजूदा भवन में संवर्धन या परिवर्तन की अनुज्ञा या नये नलों के कनेक्सन की स्वीकृति नही दी जानी चाहिए। नगर पालिका क्षेत्र में किसी प्रकार के व्यवसाय या वृत्ति के लिए अनुज्ञप्ति नही दी जानी चाहिए, नगर पालिका क्षेत्र में किसी नई योजना या कार्य के लिये स्वीकृति नही दी जानी चाहिए वर्तमान सुविधाओं के विस्तार या उन्नयन का कोई कार्य जैसे कि किसी सडक को चौडा करना या डामरीकृत करना या नालियों को पक्का करना, नल जल योजना का विस्तार करना, नये हैण्डपम्प लगाना या नयी स्ट्रीट लाईट लगाना आदि स्वीकृत या प्रारंभ नही किया जाना चाहिए, पहले से स्वीकृत किसी योजना का कार्य, जिसमें निर्वाचन की घोषणा होने तक कार्य प्रारंभ नही हुआ हो, प्रारंभ नही किया जाना चाहिए और किसी योजना का शिलान्यास या उद्धाटन नही किया जाना चाहिए।

      किसी संगठन या संस्था को, किसी कार्यक्रम के आयोजन के लिए कोई सहायता या अनुदान स्वीकृत नही किया जाना चाहिए, महापौर, अध्यक्ष, पाषदो द्वारा स्वेच्छानुदान राशि में से भी किसी कार्य या गतिविधि के लिए कोई सहायता स्वीकृत नही की जानी चाहिए। समाचार पत्रों या प्रचार के अन्य माध्यमों से नगर पालिका के खर्च पर ऐसा कोई विज्ञापन या पैम्पलेट जारी नही किया जाना चाहिए, जिसमें नगर पालिका की उपलब्धियों को प्रचारित या रेखांकित किया गया हो या जिससे किसी उम्मीदवार के पक्ष में मतदाताओं को प्रभावित करने में सहायता मिलती हो, नगरी निकायों के माध्यम से क्रियान्वित किये जाने वाले परिवार मूलक या व्यक्तिमूलक आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों जैसे कि रोजगार व्यवसाय के लिये सहायता, आवास निर्माण के लिये सहायता, निराश्रित पेंशन, वृद्वावस्था पेंशन आदि के अन्तर्गत नये हितग्राहियों का चयन नही किया जाना चाहिए। किसी प्राकृतिक प्रकोप या दुर्घटना को छोडकर, जिसमें कि प्रभावित लोगों को तत्काल राहत पहुंचाना आवश्यक हो, निर्वाचन की घोषणा से लेकर निर्वाचन समाप्त होने तक की अवधि के दौरान नगरपालिका के सिकी पदधारी जैसे कि महापौर, अध्यक्ष, पार्षद के क्षेत्रीय भ्रमण को चुनावी दौरा माना जाना चाहिए और ऐसे दौरे में नगर पालिका के किसी कर्मचारी को उनके साथ नही रहना चाहिए।

 

राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 25 नवम्बर से

राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 25 नवम्बर से

परीक्षार्थी 23, 24 नवम्बर को प्रवेश पत्र संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं

ग्वालियर 22 नवम्बर 09। मप्र. लोक सेवा आयोग इंदौर द्वारा आयोजित राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2008, 25 नवम्बर से 13 दिसम्बर तक आयोजित की जा रही है। ग्वालियर संभाग के उपायुक्त राजस्व ने बताया कि कार्यालय आयुक्त ग्वालियर संभाग ग्वालियर में कंट्राल रूम की स्थापना की गई है। जो 23 और 24 नवम्बर को कार्यालयीन समय प्रात: साढ़े 10 बजे से शाम साढ़े 5 बजे तक खुलेगा। जिन परीक्षार्थियों को लोक सेवा आयोग इंदौर द्वारा जारी प्रवेश पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं वे परीक्षार्थी परीक्षा से संबंधित समस्त कागजात परीक्षा प्रभारी उपायुक्त राजस्व को दिखाकर परीक्षा केन्द्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

 

आसपड़ौस : अबू नहीं, संविधान पिटा- राकेश अचल

आसपड़ौस :  अबू नहीं, संविधान पिटा

राकेश अचल

(लेखक ग्‍वालियर चम्‍बल क्षेत्र के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं )

महाराष्ट्र विधानसभा मे जो हुआ वह शर्मनाक है। राज ठाकरे के विधायकों ने पूरी दुनियां मे महाराष्ट्र की और उससे बढ़कर इस अखंड राष्ट्र भारत की नाक कटवा दी। उन्होने हिंदी में शपथ लेने पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी को नहीं पीटा बल्कि पूरे संविधान पर हमला किया है।

       भारत के संविधान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने प्रत्येक भारतवासी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रा दी है। भारत मे रहने वाला कोई भी व्यक्ति किसी भी भाषा में लिख सकता है, पढ़ सकता है, बोल सकता है। अभिव्यक्ति की इस स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कानून है। कानून के उल्लघंन पर सजा का प्रावधान हैं लेकिन लगता है राजनीति में नए-नए आए राजठाकरे या तो इन कानूनों, सजाओं की परवाह नही करते या फिर वे अनपढ़ है, उनके लिए संविधान की मोटी किताब में काली स्याही में लिखें सोने के अच्छर भैंस के बराबर है।

       मराठी मानुष की राजनीति करने वाले राज को उनके चाचा बाल ठाकरे ने जो संस्कार दिए थे वे अब फल फूल रहे है। व्यक्तिगत अस्मिता की रक्षा के लिए मराठी भाषा और मराठी मानुष का इस्तेमाल करने वाले इस युवा तुर्क की समझ में क्यों नही आता कि हाल में विधानसभा चुनावों मे जनता ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को अस्वीकार कर दिया है। दो सैंकड़ा सीटों वाली विधान सभा में राज के केवल एक दर्जन गुर्गे ही विधायक बनकर प्रवेष पा सके है।

       दर असल महाराष्ट में राष्ट्र के विरूध्द भावनाएं भड़काने का जो खेल चार दषक पहले शुरू हुआ था, वह रह-रह कर अब भी जारी है, वोटो की राजनीति के आगे नतमस्तक सत्तारूढ़ दल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में सलंग्न क्षेत्रीय दलों के आगे बौने साबित हो रहे है।

       विधानसभा में अबू आजमी पर हमला करने वाले मनसे के 4 विधायको के निलंबन से इस शर्मनाक घटना का पटाक्षेप होने वाला नहीं है। इस घटना की देष व्यापी प्रतिक्रिया होना चाहिए। राजठाकरें के खिलाफ कानूनी कार्रावाई के लिए राज्य सरकार आगे क्यों नहीं आ रही? क्यों राज के फतबों को गैर कानूनी करार नहीं दिया जा रहा? राज के खिलाफ जो काम महाराष्ट्रके महान हिंदी प्रेमियों को करना चाहिए था, वह म.प्र. के हिंदी प्रेमियो ने किया।

       मंदसौर की एक अदालत ने एक हिंदी सेवी की प्रार्थना पर संज्ञान लेते हुए राजठाकरे के खिलाफ राष्ट्रभाषा के अपमान का प्रकरण दर्ज कर इस दिषा में पहल की है, लेकिन सवाल यह है कि क्या मंदसौर की अदालत महाराष्ट्र कि इस मराठीदा को सबक सिखा पाएगी?

       वस्तुत: अब समय आ गया है जब क्षेत्रवाद तथा भाषावाद के नाम पर होने वालो राजनीति का बहिष्कार किया जाए। यदि यह न हुआ तो आमयी मुबई और आपण महाराष्ट्र का भाव मराठियों को महाराष्ट्र के बाहर परेषानी का सबब बन सकता है।

       दक्षिण के हिंदी विरोधी आंदोलन का हश्र सबने देखा है। तमिलनाडु में हिंदी का प्रबल विरोध करने वाले द्रविण पुत्र व्यापार के लिए फर्राटेदार हिंदी बोलते है। कष्मीर मे पष्तो बोलने बालों का पेट हिंदी में बोले बिना भर नहीं सकता। इस मामले में पूर्वी राज्य एक आदर्ष उदाहरण है। पूर्व के किसी भी राज्य में हिंदी को लेकर कहीं कोई दुराग्रह नहीं है, असम का वोडो आंदोलन भी फुस्स हो चुका है। एक दिन यही सब मनसे के मराठी आंदोलन का भी होगा।

       मराठी भाषा को लेकर पूरे देष मे किसी को कोई दुराग्रह नही है। मराठी साहित्य का सर्वाधिक अनुवाद हिंदी में हुआ। मराठी सद-संस्कृति और सुसभ्यता की वाहक भाषा है। उसे लेकर राज परेषान क्यों है? राज शायद नही जानते कि भाषाओ का अस्तित्व राजनीतिक आंदोलनों से नहीं संस्कारों से बनता है। साढ़े तीन हजार सालों से तमिल भाषा का अस्तित्व किसी राजनीतिक आंदोलन की वजह से नहीं बल्कि संस्कारों की वजह से है।

       बेहतर हो कि राजठाकरे मराठी प्रेम को छोड़ मराठी मानष में षिक्षा, स्वास्थ्य और उनके आर्थिक हको के लिए संघर्ष करें। मराठियों के लिए कष्मीरियों की तरह विषेषाधिकारों की मांग करना बेमानी है। राज भूल जाते है कि महाराष्ट्र के महान नेताओं को राष्ट्र ने अपने सिरमाथे उनके मराठी भाषी होने के कारण नहीं उनकी योग्यताओं के कारण लिया था। लोकसभा अध्यक्ष से लेकर केंद्र सरकार के तमाम महत्व पूर्ण मंत्रालयों की कमान शुरू से महाराष्ट्र के नेताओं के हाथ मे रही। इसके लिए न बालठाकरे साहब के आंदोलन की जरूरत पड़ी न किसी और भाषाई आंदोलन की।

       संविधान समिति के प्रमुख डा. भीमराव अंबेडकर से लेकर सुषील षिंदे तक को देष में सम्मान। षिव सेना या महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने ही दिलाया। मराठी भाषी अच्छी तरह जानते है कि महाराष्ट्र के इन बेटो को सम्मान उनकी योग्यता, कर्मठता और राष्ट्र के प्रति निष्ठा से मिला है।

       मेरे ख्याल से राजठाकरे के कुव्सित राजनीतिक आंदोलन का विरोध महाराष्ट्र से ही शुरू होना चाहिए। मराठी जनता को समझना चाहिए कि राज उनका हित नही अहित कर रहे है। महाराष्ट्र की अर्थ व्यवस्था में अकेले मराठियों का नही बल्कि पूरे देष की भागीदारी है देष के प्रत्येक राज्य की प्रतिभा से महाराष्ट्र, महा-राष्ट्र बना है। अगर इसे बाधित किया गया तो महाराष्ट्र ''महा-राष्ट्र'' नही रह जाएगा।

       महाराष्ट्र को संप्रभु भारत राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़े रखने के लिए सेनाओं की नहीं प्रतिबंध्द राजनीतिक दलो की जरूरत है राज और उध्दव ठाकरे को चाहिए कि वे यदि सचमुच मराठी अस्मिता की रक्षा करना चाहते है तो अपनी-अपनी सेनाओं की पहचान समाप्त कर राष्ट्रीय दलो मे अपने आपको समाहित कर संघर्ष करें।

       आज जब पूरी दुनियां बहुत छोटी हो गई है। तब महाराष्ट्र में राजठाकरे के आंदोलन से देष बदनाम ही हो रहा है। आजादी के सत्तर साल बाद भी भारत में भाषा और क्षेत्र के नाम पर आंदोलनों के जीवित रहने से लगता है कि हमारी आजादी या तो अधूरी है, या हम आजदी का मर्म ही नही समझ सके।

       समय है जब पूरा देष दुनियां की महाषक्तियों के मुकाबले भारत को ''महान भारत'' बनाने के लिए भाषा और क्षेत्र की संकीर्णताओं से बाहर आकर पूरी ताकत के साथ एक जुट होकर खड़ा हों। इस एक जुटता में जो आड़े आए, उसे तिरस्कृत कर देना ही श्रेयस्कर है फिर चाहे वह राज ठाकरे हो या बालठाकरे। जो राष्ट्र का नही वह ''महाराष्ट्र'' का कैसे हो सकता है? संविधान के आगे सब बराबर है। (भावार्थ)

                             

                                                                                                   Rakesh Achal

 

 
This Is Popular Blog of Gwalior Times Group

हमारे पसन्‍दीदा गीत

正在加载...正在加载...

ग्‍वालियर टाइम्‍स समस्‍या समाधान

正在加载...正在加载...

GWALIOR TIMES INTERNET T.V.

正在加载...正在加载...

MORENA NEWS मुरैना समाचार

正在加载...正在加载...

Gwalior News ग्‍वालियर समाचार

正在加载...正在加载...

भिण्‍ड समाचार BHIND NEWS

正在加载...正在加载...

लेख/ आलेख/ फीचर्स Articles

正在加载...正在加载...

हास्‍य/ व्‍यंग्‍य Fun and Satire

正在加载...正在加载...

GWALIOR TIMES

正在加载...正在加载...

SINGH TOMAR ANAND NARENDRA

职业
地点
兴趣
I am very young & smart .I belongs to Rajputa Community of India.I also proud to belong great Tomar Dynasty -The Last Hindu Rulers of India.
YOU WILL FEEL NICE TO MEET ME. Keep Smiling.Worship to God & People.Respect To Nature.

视频

 
第 1 张,共 88 张
更多相册 (1)
यह आपकी अतिथि पुस्तिका है Thanks for visiting!
请稍候...
很抱歉,您输入的评论太长。请缩短您的评论。
您没有输入任何内容,请重试。
很抱歉,我们当前无法添加您的评论。请稍后重试。
若要添加评论,需要您的家长授予您相应权限。请求权限
您的家长禁用了评论功能。
很抱歉,我们当前无法删除您的评论。请稍后重试。
您已超过了一天之内允许提供的评论数上限。请在 24 小时后重试。
因为我们的系统表明您可能在向其他用户提供垃圾评论,您的帐户已禁用了评论功能。如果您认为我们错误地禁用了您的帐户,请联系 Windows Live 支持部门
完成下面的安全检查,您提供评论的过程才能完成。
您在安全检查中键入的字符必须与图片或音频中的字符一致。
मित्रवर नरेन्द्रजी,
 
एक भारतीय होने के नाते मुझे हिंदी से लगाव है और आपका BLOG मुझे हिंदी के प्रचार और प्रसार के लिए प्रेरित करता है. आपका कार्य प्रसंशनीय है. एक मित्र होने के नाते मेरी आपको हार्दीक शुभकामनाएं ...
 
---
प्रदीप कुमार शर्मा
6 月 15 日
मित्रो यहॉं हम अपनी चन्‍द उन पसन्‍दीदा पुस्‍कों का उल्‍लेख कर रहे हैं, जिन्‍हें हम खुद से अच्‍छा लेखक और विचारक मानते हैं, और हमारे जीवन में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाने में जिनका अहम योगदान है । तथा वे भी जो हमें व्‍यक्तिगत तौर पर पसन्‍द हैं । जो जीवन को आदर्श, सरस, सरल और सुरूचिपूर्ण व सबसे अलग (भीड़ से अलग) तथा कुछ विशिष्‍ट बनातीं हैं । मौका मिले तो पढि़ये जरूर ।
作者 
作者 
作者 
尚未添加列表。

自定义 HTML

没有添加内容。

自定义 HTML